सारा आकाश | Sara Aakash

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सारा प्रादाण र्३ शाजबुमभार-वालिटास--दना दिया था। शभद देखता है वि मैं इस अपमान का बदला जिसे रूप में छताता हूं ) लेकिन आधिर में वहाँ गया ही क्यों २ क्‍या यह मर भीतर ही कोई कमजोरी नहीं है ?े वया मह पथ म्प्त हान को दवी दण्ड नहीं है? मुझ प्रेनालन बाली ठावर ! वहाँ पटा घा--अ्रपमान स बत्कर ससार म वाई मसी शक्ति नहीं है जा मनुप्य बी सच्ची झ्रात्या भा ख्ीचकर चाहर ता सके अ्रद मुझ दख्तना है वि मेरी श्रामा म वितनी शवित है। याद रहगा यह मुटायरात वा उपहार । जा हुप्ा अच्छा ही हुत्रा | वह रास्ता मरा था नी नहीं। हे मुझ एसा सगा जम मैं ग्पन नाग्य को रति का स्पष्ट दख रहा हें---जमस वह सार इधर उघर वे रास्तों का बन्द करता हुआ एक निश्चित रास्ता मेर लिए खोले चवा जा रहा हा। शोर नि*चय हो वह रास्ता उचाई का रास्ता है मठानता वा रास्ता ह। और द्सी टिमागी उद्धापटव से वय मरी आँखें छुरो तरह डयडवा ओई वि लाख बाधिश करन पर भा में अ्रपने वा सेमाव ने सका । प्रपतक झावा” की भार तादती छुजी झँखों स चुप इप आँसू बदत रह । है भगतान्‌ यह मर एव से वया बाघ दिया है कर्ल लाकर पटवा लिया है मुम्य / उम्र हारा वही दुरानी भावना उमश्-टमंडबर मन- मस्तिण पर छा गई कि दस बोहड प्रथ पर मैं अकेला हुँ--निहान्त अंकता | काई साथ नहां है । वाई एसा नहीं है जो मरी थवान झौर पसाने बा सान्टना के खाता स समट ले, ररी नियागा व भाँसुओं को पाष्ठरर बहू-- चठो मैं ता तुम्हार साथ हू पता नहों, विस तरह वो चद़को का मर रुल मंद दिया गया है ? कस चलेगी जिन्नमी २ झिर #गा जद काई प्ात चकित मेरे दरार के कणए-क्रा से पानी निचोट- निचाट्कर आँसा की राह उ्ीवे दे रही है 1 अपन भन वी भौर भा गहराई में में मोचता रहा कि मान सो झभी उठ और बिना विसी य कुछ बहे-सुने दाहर निवय पड़ सो कमा रह )




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