श्राद्ध विधि | Shradh Vidhi

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Shradh Vidhi by अज्ञात - Unknown
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 38.49 MB
कुल पृष्ठ : 508
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अज्ञात - Unknown

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नमः श्रीसर्वक्ञाय । श्री वि से ९९ पत्न श्रीपरमेष्टिनः प्रदद जी प्रोचेगरिछात्सताम ॥ द्घा पद्म सुपवेणां छ्लिंखरिएः प्रोदाममाहात्म्यत- श्रेतश्विन्तितदानतश्च द्ंतिनां ये स्मारयन्त्यन्वद्म्‌ ॥₹॥। जे पंसितोने पोतानी लोकॉत्तर स्टोटाइथी देवताना पांच सेरुने झने मनोवां ठित वस्तुना दानथी पचि कब्पद्वद्योले निरंतर याद करावे दे ते यराकीत्तिना स्थानक श्रीछरिदूंत सिर याचाय उपाध्याय छने सुनि- वर्य ए पंच परमेष्टी छ्ञाराधकदएवा चव्य जीवोने घणी श्रेष्ठता छ्यापो ॥१॥ हुवे टीकाकार मंगलाचरण प्रू्ण करीने व्यागल झुं करवाजुं वे ते कहे दे आया चृत्तमू- श्रीवीरें सगणाघरं प्रशिपत्य श्रुतगिरं च सुणुरूंभ्व ॥ विठसोमि स्वोपह-श्राइविधिध्करएं किंचित ॥ ए ॥ लगवान्‌ श्रीमद्ावीरस्वामी गोतमादि गणघरो श्ुत्तताणी जिनजा- पित्त सिद्धांत ने वन्नीश झुणना धारक एवा सहारा सझुरु ए सर्वने जावथधी चंदना करीने पोते रचेला श्राद्विधि घकरणनी सेडामात्र व्याख्या करूं दूं. ॥ ४ ॥




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