रघुवंश | Raghuvansh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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स्मरण डर ही आओ पिंए-पाद-पयों को... सब सह बह मुझे बचाना मिलती न ाल कांक्रो है। _,. जग के संताफ्शरों से; छस अति विचित्र सत्ता का सद्दताप आप ज्यों शिशुकों यदद चिथसात्र थाकी द॥१ ८ ढक लेता कीर परों से ॥६दस मविमा पर विरशतिका बह वाल-सुलभ सीघापन; ;.' परदा पड़ता जाता. है; वद्द जीवन गंगा-ललसा; , . ,. क्षण-क्षणके रसन्कणगणका, .. बह सदुच्यवसाय निरंतर; ,सरदा चढ़ता जाता हैं 0२... वहअध्यवसाय अयल-सा;$करपना रूपरचना में... संतत सत्यानुचरण कानिर्वक, होती जाती है; चरण प्रशस्य यति पावन; चिंतना-शक्ति निज बल को... सन,बचन, तथा करनी का 'पल-पल खाती जाती है॥ २... रद्द सामंजस्य सुद्दावनतो भावजगत- से भी कया... सिंगमागम का बह नि,'शुरुवर! हुम खो जाओगे? . - अध्ययन तथा 'अध्यापन; विस्म्ति-्सागर में सीकर... सुमपघुर कल कर्णसुधासा, थनकर शुम हो जादोगे ! परे _. वदरस-मय बाब्यलिपन; ६कया सूख ,जायगा यों ही... . वह शक्ति लोक सेवा की;वह स्नेइसुधा का सागर! *._ 'अनुरुक्ति देश की भारी; क्या रह जांदेगी शेती'.. बह साष्ट्रीयला 'अखंदितत मेरी हा का 2 हज 2 सेरी यह बीवी गागर? ४... 'पंडितिअ्था से स्यारी; १८




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