पुराण संदर्भ कोश | Puran Sandarbh Kosh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मनुष्ट्प-(१) एक छन्द का नाम (२) सूर्य के सात गयवों में से एक ।भनुल्लाद-हिरण्यफशिपु का एक पु, प्रष्लाद का भाई ।मनूप-प्राचीन भारत का एक देखमनृत-असत्य; भघमं भौर हिंसा का पुश्र ।अनेन-(१) पुरूरवा के पुप्र भायु के पुत्र (२) इक्ष्वाकुवंश के राजा पुरल्जय के पुत्र, इनके पूथ पूथू थे !मन्तक-यम ।अन्त:फ़रण-हुदय, नात्मा, विचार भर भावना का स्थान । अपनी चित्तवृत्तियों के कारण अन्त:करण मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार इन चार नामों से कहा जाता है । इनको अन्तः- फरण चतुष्टय वहते हूं । सद्र्प-विकत्प के कारण मनृष्य, पदार्थ का निश्चय फरने के कारण चूद्धि, 'महूं-अहूं' [में-में) एसा अभिमान करने से अहुट्लार मोर भपना चिन्तन करने फे कारण यह चित कहलाता है ।अस्तरिक्ष-नषपभदेव के नौ पुत्र दिव्य योगि वने, उनमें से एक । नौ योगि थे कवि, हरि, गन्तरिक्ष, प्रयूद्ध, पिप्पलायन, आविहोत्रि द्रमिल, चमस, गौर कर'भाजन । इन्होंने ठोगों को भगवान की महिमा सिसायी । (२) मुरा- सुर दा एक पुर जो थी. कृष्ण से मारा गया (३) इधवाकुचंधा के राजा पुष्कर के पुत्र, इनके पुत्र सुत्पा थे, ।मन्तर्घन-(१) महाराजा पृथु के पुत्र विजि- ताइव का दूसरा नाम । इन्होंने इन्द्र से अन्त- घान होने की विद्या सीसी थी, इसलिए यह नाम पड़ा । (२) कुबेर का मस्त्र ।अन्त्पेघ्टि-सोलह॒ संस्कारों में से एक जो मृत्यु के चाद किया जाता है।मन्घ-फश्यप भबौर कद्ू का पुन्न एक नाग ।अन्घक-(१) यदुवंध के सात्वत के एक पुत्र ॥ इनके गुकुर, भजमान, शुचि भौर फम्वरू-मनुष्ट्रप--मम्रतिष्ट । १७चहिंश नाम के पुत्र हुए । इनसे अन्धक चंदा चला । (२) यद्वंश का एक राजकुमार जो मनु का पुत्र था, इसका पुष्न दुन्दुभि था 1 (३) एक असुर जिसको शिव जी ने मारा ।अन्घकार-कफ्रोंच दीप का एक पहाड़ ।अन्घकूप-एक नरक ।अन्घताभिश्र-एक नरक |अन्ध्न-(१) भाघुनिक भान्घ्र प्रदेश । (२) एक राजवंध का नाम ।अर्थ्रफ-भन्घ्र देश के राजा ।अन्नदेवता-भोजन की सामग्री का अधिष्ठान देवता ।अन्नपूर्णा-दुर्गा देवी, सम्पघ्नता की देवी ।अन्नप्राश-सोच्ह संस्कारों में से एक जब कि नवजात थिंशु को पहली वार विधिवत अन्न खिलाया जाता है । यह प्राय: छठे महीने में किया जाता है ।अन्ननपकोश-भौतिक घरीर अथवा स्थूल दारीर जो भन्न पर ही भाघारित है । अन्न के बिना यह नप्ट हो जाता है । यद्द व्वचा, चमें, मांस रुघिर, भस्थि, मल भादि का समूह है ।अपराजित्त-(१) विष्णु का नाम, शत्रुओं द्वारा पराजित न होने वाले भगवान (२) घृतराष्ट का एक पृत्र (३) एकदद रुद्रों में से एक (४) कालकेप चथा का एक भसुर राजा |गपरा प्रफुतति-देखिए प्रकृति ।भपर्णा-श्री पार्वती का नाम 1 तपस्या करते समय ह्विमवाद की पुत्री ने पत्ते भी खाना छोड़ दिया ।मपचर्ग-(१) समाप्ति (२) मोक्ष (३) दान |* अपान्तरतम-चधिलोक ज्ञानी एक ऋषि । भगवानचिष्णु की भाज्ञा के बनुसार इन्होंने वेदों का विभाजन भर क्रमीकरण किया था | भप्रतिरथ-पुरु वंध के कतेयू के एक पूथ, इनके पुत्र कण्व थे । अप्रतिष्ट-पुक नरक ।




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