अल्पपरिचित सैद्धान्तिक शब्दकोश | Alpparachit Saidhantik Shabdakosh Bhag-3

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Alpparachit Saidhantik Shabdakosh Bhag-3 by आनंद सागर जी - Anand Sagar Ji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[७५]११ | औपं, | ओऔचान्द्रकुलीनाचायोभयदेवसूरिसूत्रितविवरणयुत | ओआऔपपातिकोपाद्नम्‌ । कह आमगमोद्धारक: आ स. ग. श्रीगष्छाचारप्रकी्णक्म्‌ू ( गाथा ) । 9 | ञआ, स. १३ | गणि. | शरीगणिविद्याप्रकीणकम्‌ ( गाथा ) । कं आ स. १४ | चउ. | ओऔचतुःशरणग्रकीणक्म्‌ ( गाथा ) । का आ. स- १४ | ज- प्र. | उपाध्यायश्रीश्ास्तिचन्द्रवि हितबृत्तियुत श्री जस्बूही प- ह प्रक्षप्त्युपाड्म । ञ दे छा जे, १६ | जीवा. | औमछयगिर्याचाससुत्रितविवरणयुत्त ओजीचाजीवा- भिगमोपाह्षम्‌ । र हे, ला. मै. २७ | ज्ञाता- | श्रीचान्द्रकुद्लीनाचा्याभयदेवसूरिसूत्रितविवरणयुत्त श्रीज्ञाताधर्मकथाडम्‌ । हे आ. स. १८ | ठाणा. | श्रीचान्द्रकुलीनाचार्याभयदेवसूरिसूत्रितविवरणयुत् ! औस्थानाइसूत्रम्‌ । ञ्र आ स- १५९ | त. औतन्दुलव चारिकप्रकीणकम्‌ ( गाथा )। 3 आ. स. २० | तत्त्वा. | भाष्योपेत रीतत्त्वाथसूत्रमू ( अध्याय: सूत्रम्‌ )। 1! ऋ के. २१ | दश | निथु क्तिभाष्योपेत ओमवविरदद्रिभद्रसुरिविरचित- विवरणयुत॑ श्रीदशवैकालिकसूचरम्‌ । दर दे. छा. जै. २० | दशचू | ओीदशवेकालिकचुणि: # दस्तपोथी | जे पु. नं. १६७३ २३ | दशाश्र.| भीदशाभ्रुतस्कन्धः । 2 २४ | देव. । ओदेवेन्द्रस्तवप्रकीणकम्‌ । आममोद्धारकः। आ.- स- ४५ | नंदी | भीमत्यगिर्याचायविहितवृत्तियुतं श्ीनन्दीसूत्रम्‌ू । क्र आ स- २६ | निरय, | श्रीचरद्रसरिविरचितवृत्तियुत श्रीनिरयावलिकापंचकम्‌ ओदा-बि गणी। _ बीर २७ | नि. अभाध्यचृण्यु पतस्य औनिशीथसूत्रस्य प्रथमो विभाग इस्तपोथी | जे. पु नं. ४८३ प्र र्ट मर क्र क्र छ्वितीयो ल्‍ जै घु नं.8८७ छू ल्‍ २५ | नि.चू छः दा जृतीयो » गा जै चु नं. ४८५ ढृ ही ३० | पड श्रीविमछाचार्यविरचितं 'पउमचरिय! ( उल्लासः ) ओशो इमनजेकोबी. जे. घ.१ क. के >शेड्ऋपभदेवजीकेशरीमरूजो, रतलाम२ जे पु. न०-शभ्रोजेनआनन्दपुस्तकालय, सूरत, हस्तपोथी नम्बर ३ वीर ज-श्रोवीरसभाज, अमदावाद.# सूत्र, निर्यक्ति अने भाष्यगायाना मात्र अतीक छे-है 5घ.नभ्रीजैनधम्म प्रसारकसभा, भावनंगर.




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