तत्वनिर्णयप्रसाद | Tatvanirnayaprasad Stambha-36

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Tatvanirnayaprasad Stambha-36 by आत्माराम जी महाराज - Aatmaram Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हि हू, गम, मोकि ममाण इनमें इेसु >० १ रणाषके प्रमाण होनेमें हतु हर भगषते सस्पोपदेशका खंदन करनेकी परबादीकी अश्चक्यता १८ य का ते इुये मी अन्यप्रताबर्नरी विसकी उपेक्षा फ्य। करत ह उसका 8५ तप और योगमम्यास्तादिसें माक्तमाप्ती बायेगी तो लिनेंद्रका माग अंगीकार 35१3 ५ मावश्यक्ता) तिसका उचर ९९ परबवादियोंका भगवदरे मार्गके किंचिप्राप्न भी फोप या आक्रोश नहीं कर सकते हैं 1 परबादियोंफे मतरमें ले उपद्रव हुऐ हैं वे मगयानके श्लासममें नहीं हुवे. ?*! परबावीयोंके अधिप्राताफी परस्पर पिरुद्ध पर्व... « १०1 अयोग दस्तुयोंफा पुन' प्यवष्फेद पा भगयानऊे उपदेश्की बशघरी अन्यमत नहीं कर सकता. «« १०८ परतीयमार्योन निनेंद्रकी मुद्रामी महीं सीसी .._.... १०९ भरित, शिब, विष्णु और ब्रह्लाकी मूर्ति ११४ भगबंतऊे शासनकी स्तुति & श्र! स्तुतिकारने दो वस्तुर्ये म्ननुपम करी हैं 7११! अन्ञानियों क। प्रधि बोष करनेकी स्वुविकारकी मसमथेता ११३ मगबानऊकी देक्षना भरूमिकी स्स॒ुवि . .. .. ११३ पर वेमोंछा साप्राज्य हथा सिद्ध किया है .. १११ असतूवावी और पंदित न्नोंके भर मत्सरी जमके कृक्षणका बर्णन... ११४ परवादीयों समक्ष अषधघोपणा अपना पक्षपादरहितपणा रू १९६ भगर्मतकी पघागीकी छूटी... «« ११६ पक्षपादरहित शोकर गुणविश्वेष्ट मगबंतकों समुश्षप नमस्कार स्पुविका स्परूप और समाप्ति .. 9... ११७ माझापनोध करनेका संबत्‌ (४) चतुथे स्स॑म-भी इरिमद्रसूरिबिरित लोझतत्र निणयक्ा स्परूप ३११८-१४ मगरूझा रका मंगलासरण हर ११८ पर्षदाकी परीक्षा/हा उपंदक्ष उपंदक्षके अयोग्य पपेद्क रुक्षण ११९ अयोर है । >> म्ल्फिप सह बा ३१८ जराण्लैजटा का धकुकदक हु का कक बे




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