जीवाभिग़म सूत्र भाग दूसरा | Jeevagam Sutra Part -2

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Jeevagam Sutra Part -2 by घासीलाल जी महाराज - Ghasilal Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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छ वियेग्योनिक अधिकारकी प्रथम उद्देशक २५ तियम्योनिके जीवों का निरूपण २६ पक्षियों की लेश्या आदिका निरूपण २७ गंधाड़ो का निरूपण २८ स्वस्तिक आदिक विमानों का निरूपण तियग्योनिक अधिकारका दूसरा उद्देशा २९ संसारसमापन्नक जीवों का निरूपण ३० भेदसहित पूथिवी आदि के स्थित्यादिका निरूपण ३१ -अविशुद्ध एवं विशुद्ध लेश्यावाले अनगार का निरूपण ३२ सम्यक-क्रिया एवं भिथ्याक्रिया ये दो क्रिया एक काल में एक जीव में होने का निषेध तीसरा उद्देशा ३३ भेद्सहित मल्लुष्यों के स्वैरूपका निरूपण ३४ दक्षिणदिश्ञाके मद्लुष्यों के एकोरुक द्वीपका निरूपण ३५ एकोरुक दीपके आकार आदिका निरूपण ३६ एकोरुकद्वीप में रहे इक्षों का निरूपण ३७ एकोरुकद्वीप में रहनेवाले के आकाराद्रिप आदिका निरूपण ३८ एकोरुकद्गीप की सलुष्य स्ली के रूप आदिका निरूपण ९ एकोरुऊद्गीपस्थ जीवों के आह्र आदि का निरूपण ४० एकोरुकद्रोप में इन्द्रमहोत्सव आदि महोत्सव विषय ग्रश्नोत्तर ४१ एकोरुकद्ीप में डिब-डमर कलह आदि विपयका निरूपण ४२ आशभापिक द्वीपका निरूपण . ४३ हयकणे द्वीपका निरूपण ४४ देवों के स्वरूपका निरूपण ४५ उच्च दिशा में रहे हुवे अछुरकुमार देवों का निरूपण ४६ नागगकुमारों के भवना दिद्वारों का निरूपण ४७ वानव्यन्तर देवों के भवन आदिफा निरूपण ४८ ज्योतिपिक देवों के विमान आदि का निरूपण ४९ हीप एवं पस्लद्ों का निरूपण ५० जगती के उपरके पञ्मवरवेदिका का निरूपण ५१ बन्पृण्ड आदिका वणेन ॥ समाप्त ॥ ३७५-३९९ ३९९-४२० ४२०-४३० ७३०--४४५ ४४५-४५३ ०५३-४७३ ४७३-४८१ ४८१-४८८ 8८९-४९६ ०0९६-५० २ ५०२-५३८ ५३८-५६५ ६५-५९ ३ ५९३-६१६ १३१६-६३८ ९१३८--६६२ ६६६२-६८ १ ६८१-६८५ ६८५-७१६ ७१६-७३९ ७३९-७४६ ७७४०-७9 १ ७७१-७८५ 9७८५-७८५९ 9९०-८०४ <०४-८२८ ८२८०-९० २




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