वकील साहब | vakil Sahib

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vakil Sahib by डॉ. जोशी - Dr. Joshi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( २९ ) ( हेंसते हुए ) शारदा सैर को सा सेर आज मिला है... झारदाः:--( सूत कातना रोककर, वकीक को ) तो भसाठी भईकों आप वेवकूफ समझते है. ! हि चकीछ.--( वकील और भंडारी एक दूसरे की ओर देखते है. )। क्या वात कहीं है शारदा तुमने इस वक्त * क्या पेच फेंसाया है. * मंडारी.--फिर मत कहना वकील साहब, कि हम ही बरिस्टिर है | आज तो बगैर डोरेसे मुद्द सी दिया है शारदा बेनने । शारदा --आप तो हमेशा वापू और उनके साथियों का मजाक ही किया करते है । भला. यह तो वतकाइ्ये कि शादी के वक्त वापस आपने जो बादे किये थे, उन्हें आप कहा तक पूरा कर रहे है | दकीछ.--छो, यह भी खूब कही । वापूके सामने हमने वादे किये थे. वे सिर्फ तुमसे शादी करने के लिये और तुमसे गादी कर ढी । चारदाः--और वाएूको वेवकूफ बना दिया। _ वकीठ --वस यहीं तो नासमद्ची है. शारदा । भा, मैं बापू को बयकूप, चना सकता हू * और किर्सीन बनाया भी तो भला बापू वेव- कूफ बन सकते है ८ अर वापूतो इन सब वातो से और तुम हम सब सम एवम अलग हनी हैं| शारदा -- आप झट दा भी कहिय छेकिन वादा करके उसे तोडना अर्टी बात थाड ही है ? बढोत उएगही नमझने की वान हैँ-जा (हाथ का इशारा पात हुए ) एसी साफ है. लेकिन कोई समझता ही नहीं | शारदा -- ( उत्तेजित हो कर । कया नहीं समझता ? दवीत एए( उसको उत्तेजित देख कर) खैर, समन्न लो; मैन गे वा | लॉगिन ऐसे-एसे महापुरुप भी नो है. जो चादी के वक्त वाघू




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