रोटी हँसे | Roti Hanse

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRamesh Sharma Mahaboob
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
761 KB
कुल पष्ठ :
94
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about रमेश शर्मा महबूब - Ramesh Sharma Mahaboob
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सिक्का नही है आबरूसिक्का नहीं है आवरू,और न पधिक्कों पर मिलती है।
तुम या तो बटोर सकते हो सिक्के,
या सिक्कों पर खरीद सकते हो जरूरत की चीजें।
आबरू ली नहीं जाती,पैदा की जाती हैऔर इसका पैदा करनासन््तान पंदा करने-सा नहीं हैसमय की भटूटी में गलती है नीयत
आबरू नही गलती है ।सिक्का नहीं है आवरू हज ल+
आवरू सीता की तरह राम के साथ वन जाती है,
द्रोपदी की तरह चीर खिंचवाती है,
गांधो की तरह गोलियाँ खाती है,
क्रास पर ईसा की तरह चढती है,
शहीदों के कान्धे चढ़,कबेला में ढलती है,आवरूअवसर देख,झंडों की तरह नही हिलती हैं
सिक्का नहीं हैं आबझ ४ “४१७ का रोदी हेँसे. ..
User Reviews
No Reviews | Add Yours...