ओ अप्रस्तुत मन | O Aprastut Man

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
928 KB
कुल पष्ठ :
172
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)निर्मल तुम्हारा रूप
ज्यों गयन में जय उठा कोई नया तारा
ज्यों हृदय में एट, फैली सरस कोई नई जल-पारा
पैग में अपने इब्ोती थुयों के महू का किनारा
आर / वह नर रूपए,
पायक् ता असरड, सतेज, यह पिर्मल दुग्हारा रूप
नमित गे
जैते कि मेरे शीश पर छाई प्रकमित पलों मे
नभ की सलोनी धूप /
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