मैला आँचल | Maila Aanchal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पैसा श्रादल र्७ सारे गाँव के औरत-मरव बूड़े-बच्चे झौर ममीर-गरीब को महंप साहेब सिप्ता देंगे। सपयोती हुआ है। यादबटोछौ का किसमू कहता है. मंपा महस्त सपने पार्पो का प्राध्छित कर एहा है। बाबाजी होकर जो रसेप्लित रखता है बह बाबाजी मही | ऊपर बाबाजौ भीतर इताभाजीं | गया कहते हो ? रफेसित मद्दी शासित है ?ै किसी और को सिखाता । पाँच डरस तर मं मे सौकरी किसा है हमसे बह कर और कौन जानेपा सठ कौ बात ? और कोई देसे या सहीं देखे झसर परमेसर तो है। महंब जब ककमी दासिस को मठ पर छाया वा धो बह एकम जबोध थी एकदम नादास ! एक ही कपड़ा पहनती थी। शह्दां बह बच्ची सौर कहाँ पत्रास बरस का बुड़ सिद्ध / रोब रत में ककषमी रोती बी--ऐसा रोता हि जिसे सुनकर पत्थर मी पिथल जाय। हम तो घो नहीं सकते बे 4 उत्करए मैंमों को खोखूफर चराने चस्ते जाते थे । रोज सुथह रुएमी द्वूप सेने बपान पर माती थी उसकी साँप कदम के फूछ की तरह फूसी रहती थी। राव में रोसे का कारन पूछते पर अुपत्राप टुरुए-टुकुर मुंह बेखने रूमती बी--ठीक गाय की डाह्कौ को तरह जिसकी माँ सर बई हो ! बैसा ही चशक्त है यह शमदसबा । बह स्तासा भी मन्‍्दा होसा देख खेशा। “महंप एक बार चार दिस के छिए पुरैतिया धरा बा। इसने सोचा कि चाए रात तो ऋछमी चैत से घो सकेगी । के धर्मपा | बाण के मुह से छूटी धो विकार के मुँह में मई । उसके बाद रूफ़मी पेसौ बीमार पड़ी कि मरते-शरते बची) पाप रुखा फिपे ? राम दाल को मिरषी आते रूथी और महंब सेमादाप्त सूरदास हो बए । एक्इम अऔौपट | “हमारा तौत साक्त का दइरमाहा बड़ी रखा है। भंडारा करता है! हम रत कोषो को साज्‌ तही पघमझते है। महँण पैथादास्त इस इसाके के हनी साथु रूपऐरे जाते के--ठप्ती साप््तर पुरात के पंडित | सठ पर आकर लोप भूख-प्पास भू जाते थे | बड़ौ पत्र जबह समझी जाती बी | कछ्ेकित जद महूंब दासित को छ्वाया कारों की राम बदर बई। बसुमतिया मठ के महथ से इसी दासित को सेकए कितते छड़ाई झगड़े और मुझदसे हुए । असुमतिया का सहँप ऋहता का रूछमी दाछित बा भाप हमारा पृस्माई था इ्सलिए आप के मरते के बाद उस पर मेरा हक है । संबाइाम की दसीख जौ पछ्तमी का बाप जिस मर का सेवक था बढ़ मेरीबंज मठ के अधीन है इससिए सछ्ठमौ पर हारा सिहर है। माह स॑ सही कानून सदादास दो ही हुई । सेदादाम के बची साहइ से समझाकर कहा बा--महूँब साइब ! इस छड्टकी का प्मानीकपाकर इसकौ छाददी क्रषा




User Reviews

  • Abhishek kabeer

    at 2020-01-08 17:38:44
    Rated : 8 out of 10 stars.
    "अनुरोध है कि पुस्तक का योग्य रूप ही dale"
    Book का प्रिंट बिलकुल साफ़ नहीं.. न ही पड़ने योग्य hai
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