नक्षत्रों की फेरे | Nakshatron Ke Phere

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
742 KB
कुल पष्ठ :
124
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ग्रह नक्षत्र विभासित तारे-
चमक रहे हैं क्षितिज किनारे,
इनको कोई देख न पाते-
यत्रों से अचुमान लगाते।
उसकी महिमा से सब हारे-
पडित लगते मूढ बिचारे,
कौन बताए सृष्टि कहाँ तक-
शून्य गगन है व्याप्त जहाँ तक
जगत नियता तुम्हें नमन है-
तुझको अग-जग ,का5वन्दन है.
तनिक शक्ति दो ब्! उबर (>|
देखें तेरी छवि हम दृग भर।॥“द1- /
रे
नक्षत्रों के फेरे 15
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