नक्षत्रों की फेरे | Nakshatron Ke Phere

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Nakshatron Ke Phere by माणकचंद रामपुरिया - Manakchand Ramapuriya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ग्रह नक्षत्र विभासित तारे- चमक रहे हैं क्षितिज किनारे, इनको कोई देख न पाते- यत्रों से अचुमान लगाते। उसकी महिमा से सब हारे- पडित लगते मूढ बिचारे, कौन बताए सृष्टि कहाँ तक- शून्य गगन है व्याप्त जहाँ तक जगत नियता तुम्हें नमन है- तुझको अग-जग ,का5वन्दन है. तनिक शक्ति दो ब्! उबर (>| देखें तेरी छवि हम दृग भर।॥“द1- / रे नक्षत्रों के फेरे 15




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