पद्माचन्द्रकोश | Padma Chandra Kosha

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Padma Chandra Kosha by पंडित गणेश उदित शास्त्री - Pandit Ganesh Udit Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सहतशणन, 1 । [ बजैश्क्म , अजातव्यअन, (भ्रिन्) न जात॑ स्यजन ( पुरपचिद ) यम्य । | अज़िर, ( न ) अजू+दिरत्‌ । उदयन नमठे प्रशिद्ध । जिसषी दादी नहीं. अत बेश. अजावरातबु, (१०) जातम्य जन्तुमाप्रस्य न धबुड असमर्थ | अनिरझोचिस्‌, ( ग्रिन) अगिर शोचि' ( देलः ) सस्थ । समात'। राजा युधिष्ठिर ! जिसक् फोई शयु उत्पन्न नहीं हुला। जातिश्ूत्य । जन्मगत्य ( प्रिब ). शथमकद्ार तेज ( रोशनी ) दाला. अजिराधिराज्, ( पु) ४८त बेगवाव राजा 1 यमणंज, झआअजाति, ( छो« ) जन« किन , न तन उत्पत्र न होना अज्ञिरीय, ६ स्रि० ) ( क्षजिर छ देय )। शॉसनके सापश अजादनी, (श्रौ०) अजरेवायते, अद+कर्मणि स्युद्‌ । एरने- सेगी हु स देनेदारा उियटीनामी वक्ष, अजानि, (प०) नास्ि जाया यस्‍्य थ० । जायाया निशदेशः । सीरदित- चातईके श्ाथ मिला हुआ. अज़िलय, (त्रि० ) दाम्मन्‌ न* त«। एरठ हौएा, जो बुटिज न हो अजिह्यग, ( पु ) अनि्श रारतं गघ्छति गमू+।ह । झाण। अज्ञानेय, ( प० ) झजेपि विज्ञेषेषि आनेयो यवारथानं | पं जमेवाठ ( त्रि० ) प्राणणीय शारोहो येन, ्जु+अप्‌+भा+नी+वर्मंणि यत्‌ ततः ब 1 रहुतसे शर्ततोंडी चोटें राकरमी जो ने दरता हुआ अपने खागीकों पहुंचनेय्रोग्प स्थानपर पहुंचाने ऐसा घोष । उत्तम घोष, अजापफ्रम्‌, ( म० ) अजादुग्पादिभ्य' जातम्‌ू । बकरीके अजिद्ध, ( ३० ) जि+पन+दर॒व । जिह्ठा एसना शा नारी यम्य घ*» । मेंडक । जीमसे बिना ( जि* ) अजीकपषम्‌, ( न ) भज्या धरपपेश * अप्माणं बी प्रीणाति, बा-क । हीर फेववर हद्म'दो बचत है । थी बरका धमुप, दूध आदिसे उप्र । एक प्रकरबा पी जो औवधिसे बना- | अज़ीगते, ( पु« ) भ्रम गमनाय गते! अम्ध॥ जिएडे भा छाता और रांही अथवा दमा आदिम प्रयोग शिया जाता है. अजापाछफ, ( प्रि० ) भवाग भापाजयी । आप! णिच+ श्युखू। ( उप ए« )। बकरियोंशें पालने वा उनपर जीविश फरनेद्दारा, अज्ञामि, ( ्रि०्) न« 6०, एते जो एंपन्पी नहीं। जो ही नहीं, अजापिकम्‌, ( न« ) ( अजाय अवयश् तेपां रामाहारः इन्द्र )। बढ़रियें योर भेरें. अजाध्यम्‌, ( न० ) भजाथ अश्राय | ऐं. ४21 परे और पोड़े, अजि, ( पु ) अज+ ईन्‌ | तेज घग्नेदारा ( जिन ) अजित, (ग्रि०्) न जितः (नब् शत )। न जोता गया हु, सजिन, ( ग ) धशी क्षिपी रजभारि, भ्रश+टगति 4 खमश, अजिनपत्रा-परिक्न, ( झी+) पडिने अर्मेद शक्ति पर्च पक्षों गस्याः ब० । पमदिश व! दफीरिव्र ममने भ्रतिद्ध पक्षिभेद, अजिनफला, ( री ) भरिन ( बर्ेविशतहाप्‌ भा ) इव फ् शमस्र: ॥ टेपरी अममे प्रशद पृषरनीण आपररइर कृप्त, अजिनयोनि, ( शो ) शरिरस बर्मद, दोरि, बात्दे ६ ह+ | दृरिषनाज । एच सिसमए ट्रिय, लानेके ऐिये छिद ( शुगस ) है। सं ( पाप )। सच बंशमें एक आश्यणणर नाम। जो छन.रोपरा पिया रै, अजीतिः, ( कली ) न जीयते। मे दौतना। शम्परा। मं क्षर होना. अजीर्ण, (१०५) शुस्भावे क्ृ, भ« ह«। देटरी ऋड धीमा दोजानेसे साये रपये अ्रप्र भ्रट्िरप्र भ एहटा। एड प्रभाररा रोग। बर्जरि हा भ० ह« 4 ओो पुरारा ग हो ( प्रि+ ) दइहजगी अजीप, (ग्रि०) शैष+मारे एन ब०७। अदरविन । मराषट्रभा | मुरद!, अजीयन, ( द्ि* ) म* ब०।ह रौवन गस | ैरिषः रहित । डिरार्री बोर होगी नतों। सम (२६)॥ बे होश । पर्व । मत, अजीपनि, (क्रौ८) न शैम्ए५, ग+शंतर आपररो+अ नि । गूप्यु-मौत बद न औए इस प्णर ( पदचन अछूर्य, ( त्रिन ) बज इरच ४८य1 शॉरिराशी। रा | द्ारेतत ९ शच बेगरार. अजेय, ( वि* ) न+जिल्‍्क मैरी यद्‌ । शिय्वे ता व झाद अम्रकृुपाइ-९, ( पु-) अहम एर्म्ए हद पद हर दारो बम्पर दपना बइ० दा दइस्पायाकपटोए ॥ इटशर पे बृरंधशरइशआाओ रृ् हरा + ( डिटंपए हेदका घट फ्ज्द्र) अउैशबम, ( २० ) ( ऋशज एापाज )। 2 ₹« । बडे शोर मर, मी




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