अव्ययार्थ: | Avyayarth

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Ath Vedangprakash Bhag-vii by दयानंद सरस्वती - Dayanand Saraswati

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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क# ओरेम्‌ के अव्यया्थ: ६८4 अ रू अभाये | भराजऊे ठ॒ छोडझ3स्मित्‌ सर्चतों बिहुते भयाव। अद्रत्त', अग्रे > पुराथे । अग्रतों यादि 1 छत्रे गच्छ 1 अड्ड पुनरथसबोघनयों । स्खोंइपि नावसन्‍्यते किमड्र विद्वान्‌ अआज्न देवदस ! अक्षेसा 5८ हते स्वीकारे व । हुते--अश्लो5 असा घावति। स्वीकारे-- अज्ञसा घर्ममाचर । अति रत्रान्तप्रकर्पोइघना5तिशयपूजनेपु । शन्‍्ते--मारामति- ऋाम्तो5तिमाऊ । प्रफर्ष-अत्युत्तमों विद्वान । छट्घने--भविवेल भुदन्फे 1 दाये---अतिबली देवद्स । पूजने--अव्यादस | भतीच # अतिदयार्थ | मतीब शीमते धर्मी। क्षय ८ मह्लाइनन्तरा55रम्सप्रश्रझात्स्यो इधिकारेपु १ महटे-- अथातो धदालिशामार । अनन्तरे--वेदरघीत्याइथ घर्मे निशसितब्य । आरस्से--अयाप्पेसव्यस्‌ । चदने--अय दकह समर्थोड्थ न समर्थ १। आऋह्स्पें--अथ बेदाथे बम | अधिकारे--अथ शनदशासनम्‌ । अड्ा ८ स्वीकारे। विद्यामदावैदि 1 अद्य रू वरेमानेडहुनि । भचाउज्थादि मया सूद 1 ३० मनु ७1 ३३ तत्र “दि! पाठ 1 २, वेषन्तदशन ३२1 २। २३ ३ अष्टा० १1 १३॥1 १ ४ आमुपब्धमूलम ६




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