चित्रलेखा से सीधी सच्ची बातें तक | Chitralekha Se Sidhi Sacchi Batein Tak

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Chitralekha Se Sidhi Sacchi Batein Tak by कुसुम वार्ष्णेय - Kusum Varshney

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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1५१३ आप्त नही हैं । इस वाल में वर्मा जी से कहानियाँ भले हो लिखी हो, पर अभी तक उनका स्याठि कवि रूप में ही थी । १६२३ तक छावादादी बवि वी हैसियत से उह्दें यवेष्ट स्याति मिल छड़ी था। कहां भी कविन्याप्टी होती, वर्मा जी अपना रग जमा लेते थे । उन दियों कविठा कहने का भी उतका अपना लहना और एक मजीय तरह वा जोश था । यह काल उन्हेंने कावपुर में बिठाया था । १६२४ मे प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश किया तो काफी बरसे के लिए कवि वर्मा वहाँ के नए वातावरण में खो गए। उनकी स्वच्छ प्रहृति से इस ऊमुक्त वातावरण व जा भर कर उपभोग क्या । पर सेसन के क्षेत्र में यह बाल उनके लिए अधकार का का रहा | न तो इस समय वे अधिक कविताएँ लिख पाये कौर न ही विद्ी अन्य प्रकार के कलाकार के रूप में ही उमर पाय । चास्तद में यह बाल उसके लिए अनुमव प्राप्ति का वाल था। इन्हीं टिया उड़ मुख गद्य लिखते दी सूझी ता (पतन ताम जा एक छोटान्सा उपन्यास लिसे डाला । पर यह उपन्यास किसी भी अर्थ में सफल हृधि नही घन सका । अमी भी वर्माजी की हैसियत कवि रूप में ही थी 1 १६३३ मे उनका पहला सफल प्रथ 'चित्रदेणा प्रकाशित हुआ । लोग अद वर्मा जी को पपस्याप्वार के रूप में जानने लग्े। यहीं से वर्मा भी ने गद्य के केद्र में प्रवेश किया) किन्तु वित्रलदा में भी उनका कवि रूप सिलमिलाता है। भाव, वणव शत्ती और भाषा तक में कवि वर्मा देखने को मिलते हैं। पर चित्रनेद्ा की स्थाति से कवि को पीछे छोड त्या। और उपस्यासकार सामसे साया । लेक्षक दो उपयास लिखने म॑ आनन्द आते लगा । इलाहाबाद का साई त्थिक वाठावरण भी इसमें सहायक हुआ । इधर वर्माजी क जावव में भी संघर्ष का झदय हो रहा था और अपनी जीविकोपाजन वा सवाल अब उसके सामने था। सन में व्यावसायिक प्रदंति भाशुत हुई, जिसने कवि रूप पर आवरण डालना शुरू कर दिया । भौर इन्ही (दिनो उनका तीत वष' तथा 'इन्सटालमेंट बहावी संग्रह प्रकाश में भाया । अब तर क्यार वर्मा कवि-वर्मा पर पुरी तरह हावी हो घुक्म पा । /विवदेणा वी रुपताति ने फिल्म जगत का ध्यान भो वर्मो जी की आर आररपित रिया । जीदिकाजन के लिए वर्मा जी ने कसक्‍ता मे 'फिल्म कार पोरेशन से सम्बंध स्थापित किया। वहीं उन्हाने ढेढे भेरे राम्तर गा लखन आरस्म विया ! रुलकते दा वातावरण इसोलिए तथाकथित उपयासत में अधिक मुघर हुआ है। स्स गान में उन्हेनि (विचार व प्रयाशन भी क्या। इ्रिन्‍्तु १६४० ये दर्मा जी को बसरता फिल्म वारपोरेशन तथा विचार दोना से




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