श्रीसुयगडाग सूत्र | Shri Suyagdang Sutra Dwitiyangam

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Shri Suyagdang Sutra Dwitiyangam by धनपतसिंह रे बहादुर - Dhanpatsingh Ray Bahadur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनुक्रमणिका पिकार हे ए अध्ययनों मोक्त इश्चनार पुरुषने यहुण करवा योग्य जे सम्यक्‌ कान, चारित्र, मोकमाग प्रसाधक सेतु विशेषें करी पश्चीश गा थामा वन करेलु छे रूडी शिक्षारूप चारित्रातुछानने श्रादान एठल्ले य्रदूण करडु तेल एृष्यथी तथा ज्ञावथी शुद्धवरूप कह्मु ते ॥ शअ्रय पोठशा व्ययनस्यानुक्रमणिका ॥ १६ शोहमु गाया नामा ध्यध्ययन दें एमा एफ उद्देशक अने एकज धथ यांधिकार ले श्रागल कठेला पदरे ध्यध्ययनोमा जे विधिरुप तथा प्र तिनिपेचरुप नावो कह्मा,ते प्रमाएे जे शराचरण करे, ते साधु कढेया य, एवो था थध्ययनर्मा उपदेश करेयो क्षे एमा ब्राह्मण, भ्रमण, निक् थने निर्गय, ए चार शब्दोना अर्ये तथा तेमा शा शा गुणो ढोय * ते दे खाडया ठे था अव्ययन पद्यवध नथी पण गद्ययध छे ॥ थअथ ॥ ॥ छ्वितीय श्रुतस्कधस्य सप्ताध्ययनानुक्रमणिका ॥ ॥ तन्न ॥ ७ प्रथमाव्ययनस्थानुकुमणिका ॥ प्रथम पामरिकनामा अध्ययन के एमा एक सददेशक घने कज य्र्थाविफार दे एमा पोमरिक थे प्रकारना वे, एक छृदव्यपोमरिक अने वीछ नावपोमरिक, त्या जे फ मलादिक ते छं्यपोमरिक घने सम्यकुदरीन, चारित्र, वि नयवान्‌ थध्यात्ममूत्ति, एवा जे श्रमण साधु ते नाव पामरिक जाएया ते साधुउ॑नो था पामरिकमा श्यधिकार जाणवो आ ध्यध्ययनने सीतशतपत्रनी उपमा थरापी के, तेयी था थध्ययनतु नाम पमरिक कसु ते था थध्ययनर्मा पृष्फरिणीने विप स्थित एवा पामरिक कमलने प्राप्त करना गा इहणातें फरी परतोथिक सर्व मोकोपायना शनाय थी कम बाये दे शने तेने परमरिंक रूप यथावस्यित १९ ५१३१ ५५१३




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