श्री जयानंद केवलीनो रास | Shri Jayanand Kevalino Ras

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Shri Jayanand Kevalino Ras by पद्मविजय गणि - Padmavijay Gani

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अडचण पढेछे, वमेनेप्केब्ल्ममा-जन छीपीथी वी७कुछ अजाप्पाछे तेयी तेओने वाँचवोने सुगम पढ़े एवा इरादाथी अमारा भाह रावसाहेव हरीलाछ छस- नाल सत्यवादीए हालनी रीती प्रमाणे शुद्ध वाठवोधी अक्षरथी नदमा- दूना श्रीमत गुछावावैजये ज्ञानखाते काढेला पैसानों सारों उपयाग याय एवं धारी आ श्री जयानंद केवीनो रास छपाववा बारु करयो हतों परंतु दैव कोपथी तेत साहेव स्वर्गवाशी थवायी नीचे सही करनार बढ़े आ अंथपूर्ण करवा्मां आज्यो छे. अमत जैनधर्मना अनेक ग्रथो छे ते मांहेकों प्रथम गणना करवा छा- 'कआ ग्रंथ छे आ ग्रंयना नायक श्री जयानंद केवरछौनुं चरित्र संवत 'रसेंना शैकामां श्री जैनशास्रना उन्नुतिकारक जिद॒श तारेंगणी आदिक ४ बंयोना कर्ता $:-“, पनखुदर॑द्रि माहाराप शी भाषामां रचेह * छ परंतु स्यारपछीना घणा जंगोने पद्ययंध पर गे “४ होवायी मुनि ओीपश्षविजयणी महाराज आ ंथनी णूदी जूदी देशो*. ओगां बसोने वे दारू करीने रासरुपे रच्यू छे. ः भपमां आरकने जाचरदा थे कि भतिहृंदर नामे भधानना ; योग्य भाणातिप दादशबत शुद्ध थद्घापूर्व- दे क तैना फ़छ पण तेमने व्रेवांज यतया छे प्थमत्रो देचादिकना सुख देवो ९ प भरपुर नये संब्यां मालूम पड़े 'हे. ४५४०७७७७७ ० श्री जयानदणी पूर्वक्ृत पण्यानुसारे, स्वेकायनी पति ृ भें राजकन्याओं परण्वाछ्े, तेशन राजादिको' हर खत




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