ग्रन्थ रत्न पञ्चकम | Granth Ratna Panchakam

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
342
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)कृतत्ञतास्वीकार
ञ्[१] बीरूनेर के सेठ, कल्कत्तानिवासी, गौरगतजीवन,
ओऔमान् हनुमानदाास जी राठी तथा श्रीमान् गोपालदास जी | आपदोनों की हार्दिक सोहाद ता और परम आम्रदता से हम इस अन्य-
रस्नपच्चक के प्रकाशन में समय हुए।(<] भ्रीमान् मुरलीवस्भाइदान जी । आप ने इन ग्रन्थों का
प्रकाशन में सम्पूर्ण अथे सहायता देकर चिरवाधित किया |[३ ] भ्रीदरिदासदासजी महादय । आप प्राचीन गास्वामि-
आचार्य्यो के द्वारा विरिचित अनेक ( लगभग शताधिक ) ग्रन्थों के
प्रकाशक हैं। आप ने “अरीकृष्णलीलास्तव” का निजकृत टीका तथा
बगानुबाद के साथ प्रथम बार प्रकाशन किया है।[४] भीयुक्त परमपूज्य गोस्वामी रासबिद्दारी जी शास्त्री ।
आप मे गौरगणोदेशदीपिरा, संफल्पकल्पद्रुम तथा प्रजविलासम्तव
का अबुवाद संशेवन काय्ये में सद्ाय देकर एम उपछार किया।(५४ ]प० श्रीनारायणुदेव कीशिक जी, मधुरा गौघाट के
निवासो । आप ने श्री कृष्णनीलास्तव तथा राधाकृष्णगणाहे शदीपिया
के अनुयाद संशोधन फाय्ये में सद्यायता दी ।[६ ] शीगुरु-गीरांगगण--जिन की छकृपासशिया से दम इन
प्रन्यों के प्रशाशन में समय हुए ।:छठ क् ककसीन कफससकक्क्-कस् न असइइंइ नी -_-_-न-न+ +न्.._...__ललवल२ल....२ु२मुद्रर:-रमनज्ञाल यंसल, पुष्पराज प्रेस, मशुसा ।
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