अन्तर्वेदना | Antarvedana

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Antarvedana by पुरुषार्थवती - Purusharthvati

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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महानाविक के प्रति!&ः#+- अब तो फेवल आशा तेरी । इड़ी-फूटी नौका स्वामी ! पड़ी भर्वेंर में मेरी उमड़, घुमड़ कर यादर गरजें, आँधी चले धनेरी। उठे भयझ्लर, चपल तरऊ्नें, ऊपर निशा अधेरी सूमे आर-न-पार, चहूँ दिशि डोलत नैय्या मेरी । हा ! तिस पर मतबाला नाविक, में चिन्ताओं घेरी विहल होकर नाथ पुकारूँ--क्यों की अब लग देरी २ अब तो फेचल आशा तेरी | ड्डे




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