धर्मशास्त्र का इतिहास भाग 1 | Dharmshastra Ka Itihas Bhag-1

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Dharmshastra Ka Itihas Bhag-1 by डॉ पांडुरंग वामन काणे - Dr. Pandurang Vaman Kane

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नस जुछ न श६१०--१६४ (ई उ.) मित्र मिश्र का बीरमिजोदय जिसके साम हैं तीर्यप्रकाप प्रायपिचि्तम्रकाश थाद्मगाप आदि। १६१०--इणप ई से प्रापश्चित्त घुद्धि धाद भादि बिपयों पर १२ मयूखों मे (यषा--नीति मयल ब्यबहारमयूल सादि) रचित मागबतमास्गर वे सेलक नीकऋष्ठ । श६५ --१९८ (ई उ ) राजदर्म कौस्तुम के प्रभेता जनन्तदेद । १७ ०१७४ (ई उ ) बैद्नाथ का स्मृतिमुव्ताफरु । १७ «१७५ हई पे) तौर्जन्दुसंखर, प्रायरिचित्तेत्दुप्नेखर, शराउेम्यूशेखर आदि सरूगमम ५. प्रथा मे सेखक गायेस मट्ट मा नागोखिसट्र । १७९ (ई उठ ) बर्मसिन्घु के सेखक गासीताय उपाध्याय। १७६०-८२ (ई उ) मिताक्वरा पर आसम्मट्री' सामक टीका के लेखक बाछस्मर |




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