प्रभोधसागर | Prabodhasagar

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : प्रभोधसागर - Prabodhasagar
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about लालाराम जैन - Lalaram Jain

Add Infomation AboutLalaram Jain

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
[ २ पुरुपाथ सिध्युपाव को सुवोधिनी नामक्की एक विस्तृत और स्वतेत्र टीका लिखी 6 1| आपको न्यायालुकार, वादीसकेसरी, विद्या- वारिधि, धर्मवीर आदि पदवियां शराप्त हं। इस समव आपकशश्री. गो. दि. जन सिद्धांत विधाल्य के सहावक मंत्री हैं ओर मारत वर्षीय दि. जन महासभा के मुखपत्र जेनाजट के सूत्रघार सम्वादक हैं६ भाई श्रीलालजी-आप जोहरी हैं जवाहरातका काम अच्छा जानते हैं । इस समय आप कलकत्ता में व्यापार करते हैं ।अनुदादकने महाविद्यालय मथुरा ओर संस्कृत विद्याल्य बम्बईम वि दयाध्ययन किया है| विद्याध्यवन करनेमें न्वायवाचस्पति वा. ग. केसरी पं गोपाल्दासली, पे. पत्नाठललजी वाकलीवाल, पं. धन्नाछाकजी काशलीवाल की विशेष कृपा रही है । विद्याध्ययन के चाद प्रायः: अध्यागत कम में ही ढगे हुए हैं; साथम वहुतसी समाजसेवा भी करते रहे हैं। श्री भारत वर्षीय दि० जन महासभाने आपकी सेवासे प्रसन्न होकर धर्नेरन की उपाधि प्रद्यान की है |1.५०आपने अबतक नीच लिखे ग्रेथाका अनुवाद किया हैं-आदिपुराण, उत्तपुराण, शांतिपुराण, सागार धर्मावत, वमप्रेश्नोत्तर, प्रश्नोत्त आ्रावका - चार, जिनशतक, पान्रकेंसरीस्तोच्र, चारित्रसार, संशयिवदनविदारण, गौतम चरित्र, साससमुच्चय, सुभो॥्र चरित्र, सक्तिमक्तावडी, दशलाक्षणिक जयमारू, तत््वानुञासन, वगग्बमणिमाला, द्वाद्यानुप्रेक्षा, प्रवोधसार, चतुर्विशति सघान, भादि । इनके सिवाबव आड्िपुगण समीक्षा की परीक्षा दो भाग, परोड्शसंस्कार, वाल्योध जन घममे ३-४ भाग, क्रिया मंजरी आदि आर भी छोट मा हे । : “इस समय पेडितलीके कुटुंचम २ कम्बाएं ओर एक चि. राजेन्द्र कुमार पुत्र है । राजजी सखाराम दोशी र सोलापूर,




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now