यही वृन्दावन रज | Yahi Vrindavan Raj

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
700 KB
कुल पष्ठ :
114
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)वह क्षण
मैंने तो न जाना
और चाहा
वह आया
मैं तिनके सा उडा
और बह गया
बहता गया
वह थमा
मे रूका लौटता निज कोटर म पक्षी सा
फिर उडा और उड़ गया।
यह उडना और उडना
मात्र बहना
नीड पर थिर हो बैठना
सचमुच ही वरण है. ?
हाँ जिया
क्या सचमुच जिया
पूछता था वृक्ष
ऑँख पटटी पर रखे चहु ओर
जाता चाक के
इस सौदागर हाट मे
जो चलता रहा
अहर्निश चलता रहा।
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