भगवद्गीता सटीक | Bhagwatgeeta Sateek

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
27 MB
कुल पष्ठ :
848
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पहिला अध्याय। - १४! करके रक्षित है, ओर हसारी सेना से न््यून भी है, इस
वास्ते हमारी सेनाके साथ युद्ध करने को असमर्थ है
हमको इनसे किश्वित् भी भय नहीं, इस अपने अमि
पाय को दुर्योधन आचार्य के प्रति इस वावय करके
सूचना करता है ॥ १० ॥सल्नस् ।
अयनेषु च सर्वेषु बथामागमवस्थिताः।
भीष्ममेवामिरक्षन्त भवन्तः सर्वे एव हि. ११
पदच्छद: ।
अयनेपु, च, सर्वेपु, यथामागम्, अवस्थिताः, भीष्मस,
एवं, अश्रनिरक्षन्तु, भवनन््तः, सर्वे, एव, हि ॥अन्चयः शुब्दार्थ अन्वयः शुब्दार्थ
च-ओर सर्वे-प्तब कोई
सर्वेदु-सब एवहि-निश्चय
अयनेष- मार्गों मे करके
यथाभागमरअ्रपनी अपनी | भीष्मम-भीष्मपिता-
जगह विषे महजी की
अवस्थिता+-स्थित हुये एव-ही(5भवन्तःल्ञाप_. अभि रक्षा कर
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