स्याद्वाद रहस्य खण्ड १ | Syadwadar Rahasya Khand 1

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Syadwadar Rahasya Khand 1  by भुवनभानु सूरीश्वर - Bhuvanbhanu Soorishwar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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महोपाध्यायजी के उद्गार आज्ञया55गमिकार्थाना यीक्तिकानाञ्व युक्तित । न स्थाने योजकत्व चेन्न तदा ज्ञानगर्मता ॥ अध्यात्मसार (६/३८) आगममात्रगम्य पदार्थों की जिनाज्ञा के आलम्बन से, एव युक्तिगम्य यदार्थों की युक्ति के अवलम्बन मे उचित स्थान में सगति-प्ररूपणा करने की कुशलता नहीं है, तव ज्ञानगर्भित वैराग्य भी नामुमकिन है ॥ ग्रन्थशरीरपरिचय पतन्न क्रमाड़ 1] । न सशोधक तार्किकशिरोमणि मुनिराज (वर्तमान मे पन्‍्यास) श्री जयसुन्दरविजयजी महाराज, तथा न्यायादिशास्त्रमर्मज्ञ तपोरत मुनिप्रवर श्री पुण्यरत्नविजयजी महाराज 'परमपूज्य सिद्धातदिवाकर आचार्य श्रोमएद्‌ जयघोषसूरीएवरजी म सा एव पूज्य पन्यासप्रवर श्री 'पद्मसेनविजयजी गणिवर की शुभ प्रेरणा से आदिनाथ जैन टेम्पल ट्रस्ट, चीकपद -व॑गलोर जैनसघ की ओर से ज्ञाननिधि से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है - एतदर्थ चिकपेठ-वैंग्लोर जैन सघ एवं उसके ट्रस्टी महोदयों को धन्यवाद है । प्रथम आवृत्ति मूल्य रू 150 00 विस २०४९ # सर्वाधिकार श्रमणप्रधान श्री श्रेताम्बस्मूर्तिपूनक जन सघ के स्वाधीन # लेसर टाईपसेट ;- पार्शव कोम्युटर्स, ३३, जनपथ सोसा , केनाल के पाश्त, ईंसनपुर रोड, घोडासर, अहमदाबाद-५० फोन - ३९६२४६




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