सार समयसार | Sar Samayasar

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Sar Samayasar by डॉ. हुकमचन्द भारिल्ल - Dr. Hukamchand Bharill

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आय क4#१जा? का ७७-७७ ७७०७७७०७० ७६७६६ ७७७. बज 4-.६१ ० +७.७०७७ ७ काजू आप मैं ज्ञानामेनेद स्वर्मावीं हूँ कर. सेठ कालोनी में हूं श्रपने में स्वयं पुरा, पर की मुझ में कुछ गन्ध नहीं । में प्ररस, अ्रूपी, श्रस्पर्शो पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं ॥11१॥। में रंग-राग से भिन्न, भेद से भी में भिन्न निराला हूँ। में हूँ भ्रसण्ड, चेतन्यपिण्ड, निज रस में रमने वाला हूँ ॥२॥। में हो मेरा कर्चा-धर्त्ता, मुझ में पर का कुछ कास नहीं । में मुक में रहने वाला हूं, पर में मेरा विश्लाम नहों ॥३॥॥ में शुद्ध, बुद्ध, श्रवरुद्ध, एक, पर-परिर्ति से श्रप्रभावी हूँ। प्रात्मानुभृति से प्राप्त तत्त्व, में ज्ञानानन्द स्वभावी हूँ ॥॥४॥॥ “ डा० हुकमचन्द भारिल्ल 8-६-७-७७०७० ७७-७७ कक बन यरयकयि आश्रय जाए ७७७७७ ४६ 4 बच्चा चर ची कक यी, बा न्‍ चाचा ७ कया 4? कयी




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