नाममाला | Naamamaalaa

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१७ नासमाला ने प्रावर्थन का हिन्दी अनुवाद किया हे । पं० जुगलकिशोर जी मुख्तार ने अनेकार्थनिघण्टु और एकाक्षरी कोश की प्रति भेजी । पं० श्रीनिवासजी शास्त्री ने भाष्य को प्रति भेज कर अनुग॒होत किया हूँ।भारतीय शानपीठ के संस्थापक सेठ शान्तिप्रसाद जी तथा अध्यक्षा सो० रमा रानो जी की संस्कृतिनिष्ठा, उदार दृष्टि, ज्ञानानुराग और सौजन्य इस संस्था के जीवन हे। अपनी स्व० पुण्यइलोकामाता मृत्तिदेवी के स्मरणार्थ मू्िदेवी ग्रन्थमाला के संस्कृत विभाग का यह छठवाँ ग्रन्थ प्रकाशित हो रहा हैं। इस भद्र दम्पति से ऐसे ही अनेक लोकोदयकारी सास्क्ृतिक कार्यों की आज्ञा हूँ।इस संस्था के कर्मनिष्ठ मन्‍्त्री श्री अयोध्याप्रसाद जी गोयलीय की कार्यदुष्टि, सत्प्रेरणा और प्रयत्न से इस संस्था का इस रूप में सठ्चालन हो रहा हें। मं इन सब का आभार मानता हूं।भारतीय ज्ञानपीठ काशी,जे पौष शुक्ल १५ “महेन्द्र कुमार जन वीर सं० २४७६ ग्रन्यमाला सम्पादक ३1।१।५०भरकाशन-व्यय४००) कागज २० रीम २२०८२९/३२ पौण्ड ७५४५॥॥ ) कार्यालय व्यवस्था प्रफ संशोधन आदि ९७५) छपाई पृष्ठ १९६ दर ५०) प्रति फार्म ४२६८-) सम्पादन २००) जिल्द बधाई ५००) भेंट आलोचना, विज्ञापन आदि६०) कफकबर छपाई ७८७॥ ) कमीशन ४०) कबर कागजकुल लागत ३९३४४ ) १००० प्रति छपी। लागत एक प्रति ३॥॥८) मूल्य ३॥।)




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