संस्कृत पाठ माला | Sanskrit Paath Mala

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Sanskrit Paath Mala by दामोदर सातवलेकर - Damodar Satavlekar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(२३ ) ६ प्रातः-युजों अश्विनों ) प्रातःकारसे संबेध- रखनेवाके अख्विदेवों ! € वि बोधय ) विशेष रीतिसे जगा दो। ( अस्थ सोमस्य पीतये ) इस सोसके पानके लिये ( इह का गच्छतास्‌ ) यहां आाभो | उपस्‌ “ बश्च ? इच्छा या कानित अर्थवारा धातु हे, इससे “उस” बनकर डससे * उषा, उषस ! ये शब्द द्वोते हें । इसका उदाहरण यह है-- उषस्ताच्चित्रमा सराधश्मभ्यं वाजिन्नीचति । यन तोक॑ च तनये च धामहे ॥ ( ऋ, १1९२।१३ ) हें ( वाजैनीवांते उषः ) हें बल्युक्त उषा ! (अस्मभ्यं तत्‌ चित्र भा भर) हम सबके लिये यह चादनेयोग्य घन दे, ( येन चोक॑ च तनरय च धामहे ) जिससे बालबच्चोंका चघारण-पोदबण करेंगे | इस संत्रके कुछ शब्दोंके मथ--- १ खित्रे ७ € चायनीये, मद्वतीय ) चाहनेयोंग्य, इच्छा करनेयोग्य | २ वाजनीवती > क्षद्वयुक्त, बछशाडछिनी । उष:काऊ्का समय बल बढानेवाला है, इसलिये इससे पूर्व उठकर इससे बल प्राप्त करना चाहिये। इस समय सोना कभी योग्य नहीं। जो सोयेगा चद्ध उक्त शक्तिसे वंचित रहेगा । 1. आओ पाठ ६ वात आ वबातु भेषजं शब्सु मयोसु नो ह॒दे । भू ण हायूदि तारपषत्‌॥ ( छह, १०1१८६:९ ) | बातः ) वाय ( भेषजं ) रोगनाशक झावाधेकों ( आ वातु ) छाता है! वह दाय ( शास्शु ) शांति देनेदाला ओर ( हदें ) हृदबकी ( सयोभु ॥ प्रसन्नता श्लौर नीरेगठा करनेवाला है, ( ना ) हम सबकी ( लायूवि ) आयु यह्‌ बाय € पभ्रतारिषत्‌ ) दीधे बनाता है।




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