षट्खंडागम [खंड 7] | Shatkhandagam [ Vol. VII ]

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Shatkhandagam [ Vol. VII ] by पुष्पदन्त - Pushpadantभूतबलि - Bhutbali

लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :

पुष्पदन्त - Pushpadant

No Information available about पुष्पदन्त - Pushpadant

Add Infomation AboutPushpadant

भूतबलि - Bhutbali

No Information available about भूतबलि - Bhutbali

Add Infomation AboutBhutbali

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
क्रम ने. विपय १४ एकेन्ठिय जीवोका स्पशेन १५ विकलेन्द्रिय जीवॉका स्पशन १६ पंचेन्द्रिय जीवोका स्पशेन १७ पुथिवीकायिकादिक जीवोंकी स्पशेनप्ररूपणा १८ तेजस्कायिक जीव कहां पाये ज्ञात हैँ, इसपर मतभेद १९ परलकायिक जीवोकी स्पशेन- प्ररूषणा २० पाँच भनोयोगी और पांच घचनयोगी जीवोकी स्पर्शन- प्ररूषणा २१ काययोगी और ओदारिक- मिश्रकाययोगी. जीवोंकी रपर्शनप्ररुपणा २२ औदारिककाययोगी जीवोंकी स्पर्शनप्ररुषणा २४ चैक्रियिककाययोगी जीवॉकी स्पदशीनप्ररूपणा २७४ बैक्रियिकमिश्र काययोगी जीवों की स्पदशनप्ररूपणा २५ आह्यारकाययोंगी जीवॉकी स्पशंनप्ररूपणा २६ आहारमिश्रकाययोगी जीचों की स्पशनप्ररूपणा २७ कार्मणकाययोगी जीवॉकी स्पशनम्ररूपणा २८ स्लरीविदी और पुरुपबेदी जीवॉकी स्पशनप्ररूपणा २९ नपुंसकवेदी और अपगतवेदी जीवॉकी स्पशनमप्ररूपणा ३० क्रोधादि. चार कपायवाले जीवॉकी स्प्रशनप्ररूपणा विपय-सूत्री १५ पृष्ठ न॑. | क्रम ने. विषय पृष्ठ ने. ३५९२ ( ३१ मति-थ्ुत अज्ञानी जीवॉकी ३९४ स्पशनप्ररूपणा घर५ ३९६ | ३२ विभगश्ञानी जीवोंकी स्पशन- प्ररुषणा ४२६ ४०० | ३३ मति, श्रत ओर अवधिज्ानी जीवोकी स्पशनप्ररूपणा ४२८ ४०१ | ३४ मनःपर्ययज्ञानी जीवोकी स्पशेन- प्ररूपणा ४३० ४११ | ३५ केचछक्ानी जीवॉकी स्प्शन प्ररूषणा ४३६ ५ | रेदे संयत, यथाख्यातविद्दा रझ्ुद्धि- हा संयत, सामांयिक-छेदो पस्था- पनाशुद्धिलंयत ओर ख्क्षम- सुम्परायिकसंयत जीवॉकों 8१३ स्पशेनप्ररूपणा म ३७ संयतासंयत जीवोका स्पशन ४३३ ४१४ | ३८ असंयत जीवॉका स्पशेन ४३४ ३९ चक्षुद्शनी जीवॉका स्पर्शन मु ४१० | ४० अचक्षुद्शनी +.. ४ ४३७ ४१ अवधिदशनी और केवलद्शची ४९७ जीवॉकी स्पर्शनप्ररुपणा ४३८ ४१८ | ** कृप्णादिक चार लेश्यावाले जीवॉकी स्पशनभ्ररूपणा का ४१५९ | ४रे पढूमलेश्यावाले जीवाकी स्पशनप्ररूपणा ४४१ ४४ शुक्कुलेश्यावाले जीचोकी स्पशन ४४२ 93 ड ४५० भव्य और अभव्य | #.. ४४४ ४२० | ४६ सम्यग्टष्टि छ. #. 585 ४७ क्षायिकसम्यग्दप्टि ,, ४४५ ४२३ | ४८ चेदकसम्यस्दशि ४9 ». ४5% ४९ उपशमसम्यग्दषटि |» #. ४४हे ४२५ | ५० सासाद्ूनसम्यग्दष्टि ,. #. १5*




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now