संस्कृत पथ माला भाग ८ | Sanskrit Path Mala Bhag ८

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Sanskrit Swayam Shikshak Part-viii by दामोदर सातवलेकर - Damodar Satavlekar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(३१ ) पाठ ९ पूर्व पाठोम दिये हुए रामायणर्के वाक्य इस पाठमें साध करके दिये जाते हैं। इनके पढनेस सेधियाका ज्ञान पराठको को हो सकता है । सुमेत्रो गत्वा राम ददश । चवन्दे च तछुवाच च | हे राम ! पिता ट्वां द्र॒प्टुमिच्छाति । गस्यतां तत्र, सा 'चिरमिति।एचसुस्ती नराखिंहो राम+ सीता संसान्या- न्तःपुरमत्यगात्‌ । अभिवाद्य च पितुश्वरणी सुसमा- (दैतः कैकेय्या अपि चरणी चचन्दे । नपतिस्तु दीनो न शाशाकेक्षितु कि पुनरभिमापितुम्‌ ? तच्च नरफ्ते रूप भयावह हृष्ठा भयमापतन्नों रामः । कैकेघी मभिवाशैवात्रवीत्‌ , काचिन्मया नापराद्ध येन में कुषितः पिता १ कब्चिन्न भरते झचुन्ने मातृणां चा मेष्शुभम ! नृपे तु छुपिते छहतेसपि जीवितुं नोत्सदे। कैकेयी तु निलेज्जा तदा55त्महित॑ बच उच्चाच ! रास * राजा न कुपितः | नास्प केचन व्यसन, सने- गत तुकाचच्त्वद्रपान्नालुभापत्त । त्वामाप्रय चक्‍ते न प्रचलतेउस्प वाणी | एप द्वि एरा मामाभिपूज्य वरं च दत्त्वा पग्चात्तण्पत राजा यथाउन्य: प्राकृतर एतच्छ्सन्वा राम ज्याथित उदाच । अहो घिल ! हू दावे | सासथ चकते नाहासे। राज्ञों चचनात्पाव-




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