महाभारत कर्णपर्व | Mahabharat Karnparv

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
35 MB
कुल पष्ठ :
592
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand) 3-ीचनी+श्रध्याय ४ ] कर्णपर्च श्डै/७3->२२७-२५२०२४ ७-*स॒ एव कदने कृत्या सहद्रणविदशारद; |परिवार्थ सहामाजे! पड़्लि। पएरमके रचैः ।अशक्कतुवद्धिवा मत्युला केसन्पुप न पा/तेला। ॥ ६३ ॥
जो महारथी यद्धकों जानता था, जिसने श॒त्रुसहार किया था, उस अभिमन्युकोी जब कोई
अकेला न मार सका, तब (द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, कृपाचाये, कण, शर्य और कृतवर्मा )कस कीइन छः बड़े महार्थियोंने जिनझा अजुनपर वक्ष नहीं होता था, मिलके चारों ओरसे घेरकर6३५५अजुनकी इंपोसे मार डाला ॥ ६३ ॥ते कृत पिरथ बीर क्षत्रधल उयवस्थितम् ।दा/शासानेमहाराज सामभद्र हतलतवान्नणे ॥ दे४ ॥
महाराज ! क्षात्रियोंके धममें तत्पर रहनेवाले वीर सुभद्रापुत्र अमिमन्युकोी रथहीन करके
दुशशासनके पुत्रने युद्धमें मारा ॥ ६७४ ॥बृहन्तस्तु महेष्वासः कृतासख्रो युद्धदु्मदः ।दुशशासनेन विक्रम्य गशितों ससादनम् ॥ ६७ ॥
महा धनुद्धांरी, शस्रविद्याका जाननेवाला, रणमत्त बुहन्त नामक राजा दुशशासनसे युद्ध करके
यमराजके घरकों चला गया ॥ ६७ ॥मणिसान्दण्डधारथ राजानौ युद्धदुमदी ।पराक्रमन्तों मिन्नार्थ द्रोणेन विनिषातितो ॥ ६६ ॥
युद्धम॑ मत्त रहनेवाले, राजा मणिमान् ओर दण्डघार मित्रके निमित्त बल दिखानेवालोंको
द्राणाचायने युद्धम मार डाला ॥ ६६ ॥अंशुमान्भोजराजस्तु सहसेन््यों महारथः ।भारद्वाजेन विक्रल्य गम्ितों थसादनम् ॥ ९७॥2 1 सरमहारथी भोजराज अंशुमानूकी उनकी सेनाके सहित महर्षि भरद्वाजके पुत्र द्रोणाचायने
यमलोककी भेज दिया ॥ ६७ ॥थाचित्रायुधश्चित्रयोधी कृत्वा तो कदन सहत्।
चित्रमागेंण विक्रम्य कर्णन बिहती युधि ॥ ६८ ॥
राजा चित्रायुध ओर राजा चित्रयोधी विचित्र मा्मसे पराक्रम युक्त युद्ध करके और शत्रुओंको
व्याकुल करके दोनों युद्धमें कणके हाथसे मारे गये ॥ ६८ ॥वृकोदरससो युद्धे इढ। केकयजो युधि।केकय्रेनेव विक्रम्प आता आता निषातितः ॥ ६९ ॥
जो केकयज युद्धमें मीमके समान था, दृढ़ निश्रगी था, वह अपने साथी कैकय वीरोंके
सहित अपने भाई केकयके साथ युद्ध करके मारा गया ॥ ६९ ॥मै
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