प्रीत गंगा | Preet Ganga

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Preet Ganga by मुरारीलाल डालमिया -Murarilal Dalamiya

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मुरारीलाल डालमिया -Murarilal Dalamiya

Add Infomation AboutMurarilal Dalamiya

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
(१७) कब मैने चाहा था कोई दु ख में मेरा साथ निमाये कव चाहा एकान्त क्षणो मे, कोई प्रिय की याद दिलाये लेकिन दुनियावालो तुमसे एक निवेदन करता हूँ मैं मेरी पीडा, मेरी सगिनि, इसे न कोई ठेस लगाये। (१८) बन्द पडे € द्वार द्दय के प्राणप्रिये अब योलो मन की पीडा, य्यया कया अनफही आज तक बोलो व्यर्थ सोघना इस जीवन में यया यौया फया पाया सातताये जो मन की पीडा, उस पर ध्यार उँठेलो। प्रीत-गगा र्प




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now