उषा मुस्करा उठी | Usha Muskara Uthi

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Usha Muskara Uthi by बाल कृष्ण व्यास - Baal Krishn Vyas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मानस-मन्दिर मैं आओ! हंप्त-विषेक गराहिनी क्िमिले, मधुर - मधुर मुश्तकाओ / मृद्ु मब्जुल बीच बजाओ / नये स्वरों में भर सम्मोहन, मुग्ध करो तुम जग-जन- जीवन, वीणा वादिनि / अन्तर मन मैं- धर भर दो आतृ-ग्रेम प्रावव धन, ४ नये ठाठ में, नयी रागिनी, गीत नये नितव याओ | सुख के स्वर-दीप जलाओ / मानस - सन्दिर में आओ / । २६०८7 20 2 पटक गा] अप ८0268 | 210]




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