सातखंडाग़म | The Satkhandagama Dhavala Teeka Ksudraka Bandha Vol-7 Khand-2

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The Satkhandagama Dhavala Teeka Ksudraka Bandha Vol-7 Khand-2 by डॉ हीरालाल जैन - Dr. Hiralal Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कम बिपय र४ एकेरिद्रय जी्बो का स्पोहन ६७५ पिकछेम्द्रिय सीर्पोका स्पर्शन १६ पचेम्त्रिय सीयोका स्पशम १७ पृथिघ्रीझायिकादिक शीवोंछी स्पर्शमप्ररुूपणा १८ तेज स्कायिक़ ड्रीब कहां पाये जाते हैं. इसपर मतमेद १९ अछकायिक मौर्षाकी स्पर्शल प्ररूपणा २० पांच मनोयोणी भौर पांच बच्मतयोगी ऊीधोकी स्पर्शम प्ररपणा २१ काययोगी भौर ओऔदारिक मि्रकाययोगी . डीर्षोक्ी रपशैक्षप्रकपणा ४४ भौदारिककापयोगी सौधों डी इपशेमप्ररूपणा २६ पैक्तिपिकृफाययोगी जीभोकी स्पत्तीनमरूपणा २४ बैकियिकमिप्र रापयोगी खीवों हो स्पश्शैमप्ररूपणा ए५ स्‍ग्राइरर्यापयोगी औीदोषी स्परीनमरूपणा २४ साइारमिभ्रकायपोगी घी बोच्दी स्पशसप्ररूषणा शे७ कामेणदाययोगी डीबोकी झ्पशेगप्ररुपणा ए८ क्ीयेदी सौर पुरुपगेशी सोधोदी स्पर्शमपरूपणा २९ मर्पुसकचदी भौर मपणठबेदी सीर्षोकी स्पर्शमप्ररपणा ३० क्रोघादि चार कपापदासे मीधोकी स्पर्शनमदूपणा पिपय-सूचौ पूष्ठ स॑| कम से है 4 ९४ ३९६ छ०० ५ ४११ छ३ ४ डे घ१८ घर घर० डर श्श्णु पिपय &१ मति-्॒त झज्ासी शौदोकी स्पशमप्रछपणा 8२ धिसगश्ञामी झरीबों की स्पशैन प्ररूपणा ३६ मति भूत भर भ्रषधिक्ानी शऔीर्षाकी स्पर्शनप्ररूपणा ६४ ममापयेयज्ञानी शीवोद्दी स्पेस प्ररुएणा ६५ केयछकछानी सीर्पोक्ी स्पर्शस प्ररूषणा ३३ संपत पथास्पातबिदरथुदि संयत सामायिक-फऐदोपस्था पमाश्ुद्ठितपत भौर सम झाम्परासिकर्तपत ज्रीचोभी स्पर्शनमरूपणा ३७ संयतासंपत जीबोका स्पर्शल ३८ झसयत जीवोंका स्पर्शन 8६९ सह्तुवर्शनी जीबांका स्पर्शम ४० मपअज्लदर्शशी » ४१ अषणधिदएनी भीर के बछ इशेती जीबकी र्पशमम्ररपणा ४२ कृप्णाविक्द धार छेध्पापाणे सीर्पोक स्पर्शशमदुपणा ७३ पद्मसेप्पाबासे. सीवोती स्पर्शमप्ररूपणा ४४ शुद्धलेश््पायाक्षे सोपोफा स्पशेल ४५ भष्प सीर भमष्प ,, ४६ सम्पग्धशीए ह्ः ४७ झ्तापिकसम्पग्शए ,, ४८ बेदकसम्पइप्टि. , + ४९, उपदामसम्परदप्ति » $+ ७७ झपास्याश्मस्पय्थ्स्श्ष्टि का रष पृष्ठ में ४२५ ४२६ ४२८ ४३० धर ड४र घर्५ इ४ ड५१ था ष्टा ५




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