वज्जालग्गं | Vajjalaggam

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Vajjalaggam by रामनारायण विश्वनाथ पाठक - Ramanarayan Vishvanath Pathak

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(४) रचना हो तो वज्जालाग का रचनाकाल ११२३ ई० भौर १३३६ ई० के मध्य मात्रा जा सकता हैं। ग्रन्थ की अपभ्रशवहुल्य माषा भी इसी तथ्य की पृष्दि करती है । बज्जाछाग का परिमाण वज्जालस्ध विभिन्न कवियों बी सनोरम रचनाओं का रुग्रह हैं, जिसमें अधिका गाधायें मूल्त” मुक्तक हैं और कुछ प्रबन्धों, आस्यायिकाओं और चरित- काशथ्यों से सगृहोत की गई प्रतोत होती हैं। हाल को सत्तसई में प्रत्येक गाया के साथ कवि का नाम भी दिया गया था परन्तु इसमें कवियों क नाम नही हूँ । रज़देव-कृत सस्कृत टीका में स्थित गाहादार! (गायादद्वार) वी अन्तिम गाया में बज्जालूग्ग को 'सत्तसइया बताया गया है । इससे पता चलठा है कि प्रारम्म में इस ग्रन्थ में केवल सात सौ गाघायें रहीं होंगी । काछाम्तर में इमकी क्लेवर वृद्धि होती गई ॥ परिणामत ग्रायाओ को सख्या पर्याप्त वढ़ गई और वज्ञाओं को संख्या मो हुगमंग टूनी हो गई। इस समय इस में ७९५ गायायें और ९५ वज्जायें पाई जाती हैं । गाह़ादार में मूठ बज्जाओ (प्रकरणों) का उल्लेख इस प्रकार है--+ गाहाण कब्वाण सज्जण पिसुणाण नीइ-धीराण। सइ-असइ-धरणिनेहाण छेय-जतीण मुसछाण ॥ धम्मिय वेज्ज-निमित्तिय-वेसाण सेवयाण सुहडाण । हरि-मयण-सुस्य हिययालियाण बाहण नमणाण॥ घिहिंणाण ओल्य्गावियाण दुईण धन्तससयाण | पचम-वियोग-प्रिम्माणथ. माण-माण-सवरणयाण ॥ मालइ-भमर-गयाणष करहय लायण्ण-बालकित्तोण | दइयाणुरायवाल्सटवण-बाल-सिक्खाण 1 पथिय-हसघणाण वसतयाण य सरत्तसइयमि | एवं बट्ठालीसा हंवति वज्जाउः नायब्वा॥ ++आठवी गाया की टोंका इसके बलुछाए शूर पथ मे. ४८ वज़्थाएं कौोए, गए, सो, गया, दो थयो 1 वतभान संस्करण की उपयुक्त ७९५ ग्राथाओं में विभिन्‍न प्रतियों की अतिरिक्त गाधाओं को भी मिला देने पर यह सख्या बढ कर ९९६ हो जातो हैं। गाहादार में बणित ४८ वज्जामों में ४३ वज्जायें वर्तमान सस्करण में स्पप्टल्या उपलब्ध




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