तत्वअर्थ सूत्रं | Shree Tatvarthsutram Part-2

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Shree Tatvarthsutram Part-2 by घासीलाल जी महाराज - Ghasilal Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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५ डे २४ दशशनप्तोहनीय अन्तराय कम के उदय से .अमण में दर्शन और अछाभपरीपहकी उत्पत्तिका निरूपण छू, १३ २३२-१३४ ३५ चारित्रमोहनीयकर्म के निमित्त से होनेवाले सात परिपहोंका कथन सू० १० २१५-२३८ *२६ चेदनीयकर्म के उदय से होने चाछे _* '्यारहपरीपहों का कथन सू० १५ २३९-२४२ “२७ एक जीव को एक ही काछ में होने वाछे परीपहों का कथन सू० १६ २०२-२४७ >>» २८ हिसादि से निवृत्ति आदि त्रतों का निरुपण छू० १७-२४ २४८-२५० >/ “२९ हिंसा के स्वरूप निरुपण छू० २५ २५१०२५७ ८८३० मृवावाद का निरूपण सूं० २६ २५७-२ ६५ £० ३१ 'स्तेय का स्वरूप निरूपण स्ृ० २७ २६५०-२७ १ ३२ मेंथुन का निरूपण सृ० श८ २७१-२७३ ४” ३३ परिग्रह का निरूपण छू० २९ २७३-२१८५ # ३४ पांच अणुत्रत का निरूपण छू० ३०-३७ २८७-२८७ ५7 ५ मारणांतिक संलेखना का निरूपण छ० ३८ २८८-२१९५ ३६ सम्पर्दृष्टि के पांच अतिचार का निहपण छू० ४०० २०९६-३१ ३ *' ३७ अजुव्रत एवं दिखत के पांच अतिवारका निरूपण छू० ४१-४२ ३१४-३२१ ' “ “३८ तीसरे अणुन्रत् के स्तेनाहवादि पांच $ 4. शत हलक ले अतिचारो का निरूपण सू० ४३ ु ३२१४-३३ १ ”. ३९ चोथे अणुव्रव कै पांच अदिचार का निरूपण छू० ४४ ३२३-३ श७ 151 5७8७ पांचवे अणुव्रव के पांच अदिचार का निरूुपण छू० ४५ ३३८-३४५ '४१ दिखिरत्यादि सात शिक्षात्रत के पांच पांच ' अतिचारो' का निरूपण सु० ४६ ३०६-३५१ ४२ उपभोग प्रिभोग परिमाणवत के अति चारका निरूपण छू० 9७ ३५२५--३५७ [| निरूपण छ्ू० ४८. ३५६-३६४५ निरूपण सू० ४९ ३६४-४३७० का निरूपण झछू० ५० ३७०-३७७ | निरूपण सू० ५१ ३७७-३८२ हपण छु० ५९ ३८३-३८९ ४३ अनंयद्॒ण्ड विर्मणत्रत के अतिचार क ४४ सामयिक्रत्रत के पांच अतिचारो' का ४५ देशावकाशिकतत के पांच अतिचारो' ४६ पोपधीपवासब्ंत के पांच अतिचारो' न रैक बारहवे व्रत के पाँच अतिचार का नि




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