गीतों का क्षण | Geeton Ka Kshan

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
230
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)गोता का क्षण ४ ३ *
देह से वाहर निकलता हूँ
आज तक निगले हुए होरे उगलता हूँ।
मैं देह से बाहर निकलता हूँ।
टोकरी को फूल देकर
वे हवायें माँगता हूं
निर्गन््ध हो जिन के लिए
नींद में भी जागता हूँ
वे जिन्हे मैं दोड़कर भी छू नहीं पाया
पर लबादे सी सदा जोढे रहा माया
नीम-महुओ मे जिम्हे कुछ स्वाद से परखा
जिन पव॑तो को बादलो का पाग घर निरखा
चरण दे अब उन शिखर की सीढियो को मैं,
आ ढलानो पर कही फिर फिर फिसलता हूं ।
मैं देह से बाहर निकलता हूँ ॥
User Reviews
No Reviews | Add Yours...