आत्मा निर्वासन तथा अन्य कविताएं | Aatma Nirvasan Tatha Anya Kavityan

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Book Image : आत्मा निर्वासन तथा अन्य कविताएं - Aatma Nirvasan Tatha Anya Kavityan
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कलाएँ अपनी कुजी सेउनके द्वार खोलते हुए थकती हैं, द्वार पर द्वार, द्वार पर द्वार,द्वार पर द्वार, अनन्त द्वारों पर द्वार;वे जो दुनियाएँ अवखोजी रह गयींकम रहस्यपूर्ण नही थीं,उनसे जी खोजी गयीं;और व्यक्तिगत दुनियाओं का विसर्जेन--- फिर उन्हें छौटाकर लाने का द्वारबन्द कर देती है, क्षतिपूर्ति अच्म्भव है ।गूंजते रह जाते हैं संवेदनशील शब्द, जिनसे फिर आने वाले लोग अपनी-अपनी दुनियाओं कानया सृजन करते हैं ।सृजन करते हैं भेरे-तुम्हारेओर हमारे व्यक्तिगत जगत जो शब्द,उनमें हैं कितना सामझञस्य, कितना विरोध है, कितनी लय और कितनी अलय है,इस' पर निर्भर हुआ करता हैभये विश्व-बोध-काव्य का सौन्दर्य ।हम सब शब्द हैं, संगत-असंगत, सार्थक-निरथेंक, सब अपनी गरिमा मेंमस्तक उठाकर उद्यत हैं अपनी जगह पाने को ओर इस काव्य को कोई सही रचता :दब्द स्वयं संघर्य या सन्धि करअपनी-अपनी जगह वना लेते है जुटकरऔर हर बार नयी-नयी छगती है आत्मांशन्सी प्रिय एक महाकाव्य-सी दुनिया 1(१६६३) सर




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