मेघ मल्हार | Megh Malhar

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Megh Malhar by सुमति क्षेत्रमाड़े - Sumati Kshetramade

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मेघ मत्हार श्र किंतु सोमनाथ राय ने अपने घर की लड़कियां काशी, जूनागढ़, मेवाड़ आदि दूर-दूर के स्थानों पर देना आरंभ किया और यह से कन्याए अपने चर लाये । अन्य लोगों ने भी उनका अनुकरण किया । इस तरह नगर में नागर ब्राह्मणों की बस्ती बढ़ गई। बहां की नागरवाडी सारे गुजरात और सौीरास्ट्र मे शामिल हो गई। नागर आअआह्यणो में लड़ाकू लोग भी थे। मौका आने पर वे रणवेश धारण किये, हाथ भें तलवार लेकर बाहर निकल पड़ते थे ! सोमनाथ रास की मत्यु जिस वर्ष हुई, उमी वर्ग गुजरात की भूमि पर मवन-दल की छाया पडी। अतिम गुजराधिपति कर्ण हारे और दक्षिण की ओर माग गये । सवन-दलों ने सपन्‍न गुजरात पर अविकार कर लिया। अनेक नगर लूट लिये । अराजकता आर म हो गई । यवन-दलो के साथ-साथ लुटेरो की भी बन आई। चोर-उचक्के भी सिर उठाने सगे। दुबंत, अधुरक्षित गावो को लूटने श्षये । जो मिलता, लूटकर वे लोग आगे बढ़ जाते थे । पाटण से आने बाला एक मार्ग वडनगर के पूर्वी दिल्ली दरवाजे के सामने से ठठ दिल्‍ली तक जाता था। इसी रास्ते से विदेशी हमला- चर आते और ढाटा बाघे हुए लुटेरे भी गुजरते । धुटेरी के आने की खबर णासूसों द्वारा प्राप्त होते ही नगर के चारों दरवाजे बद कर दिये णाते । डर दितली दरवाजे पर ही अधिक रहता था 1 कमी थुटेंरों के दल घोड़ो को दौडाते हुए आगे निकल जाते और कमी दरवाजे पर टककरें मारते। द्वार पर थपथपाह८ होते ही घोकी का पुराना लड़ाका पहरेदार रणमल्ल माठी हाथ का हूकक्‍्का नोचे रखकर अपनी सफेद मूछों पर ताव देता । साठ से अधिक उम्र हो जाने पर भी अभी उसकी काठी मजबूत थी । वह उठकर दीवार पर लटकती हुई अपनी तलवार हाथ मे लेता और सीढिया चडकर कोट के ऊपर जाता | इधर दरवाजे पर धवके लगते रहते, पर उस वीर राजपूत को जैसे कोई जल्दी ही न हो 4 वह अपनी तलवार विकाल्कर नीचे देखता हल लुटेरे




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