हाड़ी शतक | Hadi Shatak

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
811 KB
कुल पष्ठ :
96
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हाडी शतक
मर दिया। लेबिन अब वे ही हाथ, स्वर्ग में पहुँचने पर श्रपने
पति के विवाह-कक्ण को खोलने मे विलव कर रहे है!पिउ श्ररियां घड़ खोलिया,
अब तो खोलो श्राय ।
हुडी बंधिये डोरडे,
बेठी सुरपुर मांय॥१॥।शब्दार्ष - पिउ>पति, भ्रिया>शत्रुप्रों बी, खोलियारूवाट दी ।भावार्थ -हाडी भ्रपने पति से बहती है-हे प्रियतम !
युद-भूमि में भापने तलवार से शत्रुओं वे घड खोल दिये हैं
(तलवार से शत्रुम्रों वी ग्देनें काट दी हैं); श्रव तो झ्रावर
भेरे विवाहयबण फोलो ! यह झ्ापपी हाडी, जिसके हाथ
में विवाह-पवण बेंधे हैं, स्वर्ग में बैठी श्रापवी प्रतीक्षा कररही है ।हाडी सुरपुर रे मेंही,
सुर नारियाँ गवाय।
तो रावत रण नहें तने,ओो्कू रही सुखाय ॥रणा१३
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