प्रश्नव्याकरण सूत्रम् | Shri Prashnavyakarana Sutram

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Shri Prashnavyakarana Sutram by घासीलाल जी महाराज - Ghasilal Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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४२३ नारकीय जीव कया २ कहते है बह पर्णन १०६-१०८ २४ प्रमाधार्िक नारकीय जीरों के प्रति बया२ फरते ६ उनका फथन १०९-११०२५ »चैदनाओं से पीडित नारफ जीदों के आक्रद का निरूपण १११-११७ २६ परमाधामिकों के डाश फी भर यातनाओं के पकर का..... निरूपषण ११७-११८ २७ यातना के गिपय में आयुधों (शब्दों) के प्रकारों का निरूपण ११९-१२१२८ परस्पर में वेदना को उत्पन्न करते हुए नारी यों फरि दशा : का वर्णन; १२१-१२७ २९ नारक जीरों के पश्मात्ताप झा निरूपण , ११८-१३० ३० तियगाति जीबो के दुःखों का निरूपण १३१-१३६ ३१ चतुरिन्द्रिय जीवों के दुःख का निरूपण १३७-१३८३२ तिन्द्रिय जीओे के दु ख का निरूपण १३८-१३९ ३३ हिन्द्रिय जीवों के दु!ख का वर्णन १४०- ३४ एकेन्द्रिय जीव के दुःख का वर्णन१४१-१४४ ३५ दु खाँ के प्रकार का बणेन १४५-१५१ ३७ मनुष्यंभ्द मे दु'खों के प्रकार झा निरूपण १५२-१६३ छ दूसरा अध्ययन ३७ अलीक्बचन का निरूपण १६४-१ ६८ श्ट अलीकवचन के नाम का निरूपण १६८-१७४ ३९ जिस भाव से अहीक वचन कहा जाता है उसका निरूपण १७४-१७९ ४० नास्तिऊवादियों के मत का निरूपण _ १८०-२०५ ४१ अन्य मनुष्यों के मृपराभाषण का निरूपण २०६-२१४ ४२० ग्पावादियों के जीव पातक वचन का निरूपण २१७५-२४ १ ४३ झूपादादियों को नरक प्राप्तिऱूप फलमाप्ति का वर्णन २४२-२५२ ४४ “अछीक वचन का 'फ़लितार्थ निरूपण २५३-२०६ ; तीसरा अभ्ययनन४५ अदृत्तादान के स्परूप का निरूपण २३५७-२६ १




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