जैन तत्त्व का नूतन निरूपण | Jain Tattv Ka Nutan Nirupan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
184
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)है. ७४
जाम धरम | धा्मिक दौीयन ही नेसमिक् नीयत है) चाप चीपन
एवं निरयय है।
पशुरण झपन जीपक से शरसिता मार्ल दोसा बस ही घम
रहित मयुष्य भी झपने ज्ञोयन स नहीं शरतात | धर्मरद्धित मनुष्य
कयल पु भृमि की शामारूप है ।झगर या पडा चाय डि पमद्दित
मनुष्यों का झध्रिद्ांश भाग पशुमृसि को भी लग्लित कर दवा हैँ.
हो भी अत्युतिह 1 श्गी । मसुत्य चिवन शैश स पशु कोनिमि
उतने भर्शा म यह प्रिपयकपायकी प्रवृत्तियाँ स लग्नितनडीं दाता
जितने अश में पाशयता का ऋमापय द॑ उतने झश में झपन अधम
मय जीवन पे जिये लज्ताय पर्चात्ताप द्।
| जड़ एसिन मे जिम प्रशर झरित एव पायी की शक्ति काम
कार रही दे उसी प्रतार ज़ट शरीर म झत्ति रूप घम ये पुयय दे
धम को भांदर दुव या पद्वी उन्तु बद दमार दर एफ श्वासोच्दास
में सद्दायक दै ; दना धम व मनुष्य वा मूल्य मांस व एियड रू
अधिक नहीं दे | धम क ही प्रभाव मे साँस डा यद्द लोदा एथ्या
पर गिर पड़गा ।
घमतरप पु्भों मे नहीं हैं | किर भी ता मनुष्य प्राप्त शक्ति
हा सदुपयांग नहीं करता दे यद्द पग्चु से भी निशष्ट क्या न फटा
लाय ९ घर्ते 4 शरण विया पश मात्र भी छुछ नह मिक्ष सकता ।
घमर बोइ कट श्रोपधि नहीं दै कि जिसछा सदाशा मिर्प दुख में
ही लिया लाव। घम यह कोड ध्याभूषण नहीं दे कि जो माय पथ
दिनों में ही पद्चिना ज्ञाय 1
झधम राय की सवारी पधार तथ उस पथ निमित्त अली
सड़क ( 11090 ) यनाइ जाव उस पर म'पमन्न मिलाया जाब कौर
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