श्री जैन पद्य रामायण [खण्ड 1] | Shri Jain Pady Ramayan [Khand 1]

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Shri Jain Pady Ramayan [Khand 1] by बालकृष्ण उपाध्याय - Balkrishna Upadhyay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्री जनपद रामायण प्रथम खण्ड | (९ जा अत #5.. >३७ ०७ 5 रे औकाओ के. अनेक #१ आप #र कक. 3५ ५.२०क हक # १७०१५, ह ९५//“९०० ९..४०५५/०, ११. की 'इन्द्र' तणे अधिकारे अधिफो, का राज्य निशका है |ब० ॥१५। निमित्तिए मुज तुमपर भाख्यों, मनसा अधिक उम्राही हे । तेडी कुठुम्ब आडम्बरे राजा, सा कन्या तब व्याही है ॥न्र०॥१६। पुर 'कुसुमांतर' नव॒रे बसावी, वासवनो* सुखमाणे है । धम सुकम करन्तां चहुलो, जन्म कृताथ जाणे है ।च० || १७। एक दिवस कैकेशी' निशाएं, सिंह सलणो देखीयो है । गजकुम्भस्थलर भेद करंतो, तृपने हप॑ विसेखियो है | ब५।१८॥ गर्भवती सा राणी वाणी, अति असुहाणी भाखे है । भोडे अग कलेश करन्ती, मानघर्ण मनराखे है ।ब० ॥ १९॥ दर्पण छांडी खडगे घुस देखे, इन्द्रही आण मनावे है । अरिशिर पाव दियू इत्यादिक गये प्रभाव जणावे हे ।ब० ॥२० प्रतिश्पखियों घर त्रास पडंतों, शुभवेला सुत जायो हे । महम« चतुर्दश धर्ष प्रमाणे, अविचल' होई आयो है। च० ॥२१॥ 'भीमेन्द्रेण!* पूरापित परगट, साणिक नव निपायो हे | हार उठाई ऊचो लीधो, पहरी गछे शोभायों है [ब० ॥ २२॥ गी 'क्रैकशोः एह तमासों, अचरिजत् अधिक उपायी हे। र्नश्रवाने एह अपूरब, राणीए ख्याल दिखायो हूं ० ॥२शे॥ राक्षस इन्द्रे 'घनवाहन ने' आप्योधी इस सुणियों है । पूर्वेज़ जे तवअच्यों पूज्यों, देव तणी परे थरुणियों है 1० ॥२४। नाग हजारे सेवित किणही, ऊपाड्यो नत्रि दीढो हे । बालक थांगो लिलाएसो, कण्ठे पहरी बैंठों हे।ब०॥ २०॥ नव साणिक मानव झुख दीसे, दशमो सहज दिखायो है । द्शभुख' नाम पिता ठव थापे, उच्छच अधिकी थायो है |ब०॥२६। 0-र*मणुर+>म आम... 2.आा-म पल आम >/म-फन- करन 4-8 आता पड 12 जम आ/०3०५५०० ५-५ ध>प“ नी जक++333 3, है इन्‍्ठ्र 1 २ह्दा धौोौन कम्भस्थम्ठ भदताे हट दीठ 1३ शाह 1३ सादर हजार धर्ष ( सघस-साहइख ) जनगामायणमा साथडा थार इजार दप नृ प्रमाण लप्य छे 1 ५ भीमेन्द्र राजाए पू्ष आपेस ॥




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