आधुनिक भारत का बृहत् भूगोल | Aadhunik Bharat Ka Brihat Bhoogol

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Aadhunik Bharat Ka Brihat Bhoogol by चतुर्भुज मनोरिया - Chaturbhuj Mamoria

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श दे सिसाई हे भी भारत का स्थान झग्रगण्य है । यहां ४.४५ करोड एकड़ भूमि पर सिचाई वी जाती है श्रोर ३२ करीड एवड भूमि पर सती । प्रथात १७ प्रति भाग पर शिबार्ड उपलब्ध है जयक्ति सिर में ७० प्रतिशत पर जापान मे ४८ प्रत्तिगत सीन थे ४० श्रेप्तिगत 5राक से २० प्रतिदात आर पाकिस्तान मे ८० गतिशतत भाग पर सिचाई होती ४ । फिप्तु एव थे सबरों अधिक शिचार्ड ते वा जफा भारत थे ही हैं जह। लगभग ५० हंगे।र मील लग्बी नहर है । विस बी. लगभग ३० प्रतिशत पाये आर ८४ प्रतिसात बल शारत में पथ जात है फिनतु हतना होने पर भी दूध का उत्पादन प्रति गाय पीछे केवल ४१३ पा चापिक है । कल उत्पादन की दाष्टि से भारत का स्थान दूसरा ४ । यहाँ प्रिटेग का ४ गुर डेसमसाक का ४ गुना मोस्ट्रेलिया का ६ गुना श्रौर न्यूजीलैय का ७ गुना दूप पेदा चिया जाता हैं । खणिज पदार्षो की दाष्टि रो भारत सनी ही कहा जा सकता है बयोकि किसी ऊंची राभ्यता वाले देश को जिन-जिन खनिज पदार्थों की य्रावण्यक्ता होती हे वे सभी यहा यर्तमान है । रूम को स्पीड फर विद्व में सेगनीज पंदा करने वाले यो मे भारत का रबान दूसरा है । शाख्क इलंमेसाइट जिरकन आर मोनेजाइट उत्पादन मे तो भारत का एकाधिकार ही हैं किन्तु दिन सोना सीसा जस्ता र्लेटीनस पटॉलियम अधि ख्िजो में यह दरिय्र है । गाक्ति के साधनों की उपलब्धता में गारत की स्थिति सगण्य ही है फिनतु संभावित जल विद्युत दाक्ति में फिश्व वे देखो में इसका स्थान रुस घोर कनाडा के याद है [सभी नदियों में लगशग ४१० लाख किलोवाट लिद्य त शक्ति छोने का अनुगास तिस्ग तालिका रो स्पप्ट होगा कि भारत मे विश्व में प्रात किये गये खविण पदार्थों का मना अपिगत सिलता है सन कोयला १.० प्रतिशत तांबा ०.४ प्रतिशत मिट्टी का तेल ०८ प्र० दा० सोना ०.६ प्र० दा लोहा १८५ ्र० श० श्र श्षा अप ० प्र० झाक प्रेगनीज १५ ० घ्र० से० नमक ०.६ प्र० शक सश्जीलार ०.३४ प्र०् झु० पि भारत का प्रमुल उद्योग हे जिसमें ७० प्रतिशत जनसंग्या लगी हुई है जनफि अप्य देगी मी फू पर शाधाशित जनसर्या का प्रतिशत सगे महल कम हे । पणलेय मे ७ प्रतिहल स० सज्य प्रमरीका में १० प्र०् गण फ्रास में २६ प्र० शा जापान में ४६ प्र० बाण बेरिजियस में १३ प्र० शान नीदरनैद्स में २२ प्र०् शन्शऔर पर जसंगी में १४ प्र० शभ् है। स्पष्ट है कि इस देशों की तुलभा में भारत में ग्रभी तक ्रोदोगिक विकास पुरी तरह नहीं हो। पाया है शरीर इसीलिए प्रति व्यक्ति पीछे असर आाय थी बहन ही कम हैं । एक शारतवारी की ग्ौसस शाय केवल ए४४ छह है जबकि एक जापानी की १ २०० सर स्यूजीलेडवासी की ४ ६८८ रण एवं आस्ट्रे लियावासी की ४ ०४१ स०् शग्रेज की ४ ७११ ४० कसा डवासी की ७ ११४ ० प्ौर अगरीकी की १० ६११ स० है । एससे प्रतीत होता है कि श्रौसत भारतंवाशी दारिख्र है तथा उसके रहुननतुन का स्तर बहुत ही नीचा है । 2. शाछ्ाधि हें (. रिडफृष्ण 0 घाह फेल्एपठफूफ़ाबा 1 (फ्राविए सात किक अिपफध्छाऊ का अएप छ हू.




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