बृहत्पाराशरहोरा शास्त्रम | Brihatparasharahora Shastram

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutTarachandra Shastri
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
12 MB
कुल पष्ठ :
636
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about ताराचन्द्र शास्त्री - Tarachandra Shastri
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्द उत्तरसष्डायविषयानुकुमणिकाप्रतिषाध्वविषया: पृ०्सं०.. प्रतिषालविधयाः पृ०सं०
आरभतों यावद्रश्समापत सतगि- स्पानविशेषेण रव्यादीता पाचकादि ५८०९
दिचार पछ४ सन्ञा
रश्मिवशादैध्वर्यविदार /. स्थानसबधेनपाचकादिय्रहा ५८ (
बहुपोषकंत्वयोग ” रु्यादीबा दशागोडारादिफलकाल प्ट्र
परतों देशाधिपत्यघोग पा एकादशोष्ध्यायः ११राजयोग . अय मासचर्याया शुभाशुभ-सार्वभौमपदाप्ठिपोग ४. दिवस भानम ५८३
नरादिपोष्यसल्याविचार घ द्वादशोध्ध्यायः १२
का शुद्याणाविब राजपोगकपतम पूर्वाध्यायोक्तयायोंगभगपरपरा ५८३
राय 1 का ७७ 1०५. स्थातविशेषकरणाधिपसभवेन भग हा
हा 410 ध राश्मानयनेन भगातरस् रु
अध्यायोपसहार मी क्यो सभिप्रयोजनम् प्ट४ले हक प्रकारातरेण भावभग शअथ लेशास्थानादिविदारेण शुभाशुभ- अगयोजना के
फलमू ५७६ ब्रमोदशोष्ध्यायः १३
भावफलाना बलहातिफलनाशविघार गा अब दादशभावनामानि ५८५
पूर्वभागोक्तयोगाता व्यवस्था ५७६ इविप्रहविधार
भावविदयार के अ
पिलूमाज चद्र॒ग्रहदिचाररिप्टविचार मौमविचार ण
स्पातकरणतासतस्येत विकोणणोघत- बुधवविद्ार छः
अक्लाह् एकाशिपत्पधोपतपराप बाकी ध्कम्ता गुश्विचार ५८६
त्यज्षोधनप्राप्तरेखाकरणेप्वब्दा- गुिवार मन
नयबम् ५७७... जनिविधार छः
मूर्यतच्चतुर्थाम्याभायु कंथनम् र; उक्ताों' छ
रश्मिविचारेण पिकृमात्ररिष्टम् जद ५७७०७वेश्यस्थाने रेखाभावे आयु कथनम् हाकरणादिविदारेण भाववितार चतुर्दशोष्ध्पायः १४दशमोष्ध्यायः १० अयपिडाशवादिभेदवर्णनम् ५८६अथाब्दचर्यया भाग्यादिवर्णगम् ५७९. पिडायुप्ुवादबर्शनम् हि
आाजफलज्ञाने बालचर्पा ५८०... पुवायुर्दायपरुवाकबिचार
भावफलबञाने शुभग्रहपापग्रहभेदेत र््यायुर्दाय घ्रुवाकविचार 188
ऑिज्षेष वर्षमासादायुरुत्यादनप्रकार है
कारबसजयहविचार नि नवाशायुरुत्पादनप्रकार मा
भावेषु शुभाशुभप्रहविचार ». प्रह्नमादुगतायुर्दायोत्पादनप्रवार हा
दृम्बलसिद्धप्रहब्धवस्था ७. अप्टकवर्गायुर्दायोत्यादनप्रकार हे
स्त्रोपुस्वभावविचार ७. ध्रुवाक्महितनवाणापुर्दाधकथनस् ५८६
User Reviews
No Reviews | Add Yours...