महाभारतभाषाआश्रमबास | Mahabharat Darpan

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Mahabharat Darpan by संबल सिंह चौहान - Sambal Singh Chauhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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२ आश्रमवास भाषाका सचीपतन्र । अध्याय । ' विषय | पृष्ठ से पृष्ठ २४ सूत सेज्यक्ो वनमें आये हुये मुनियों से राजा युविष्टिरादि पांचों भाइयों को चिन्हाने के श्रथे बृतलाना ४१ २६ युपिष्िर व धृतराष्ट्र का परस्पर बात्तोलाप ” 8. २७ बनमें प्राप्त समयकी पांठवोंकी कथा बरणेत ु ४४ २८ ब्यासर्जीका व युधिष्टिर का संवाद 8९ २९ व्यासजीका व पृतराष्ट का परस्पर वात्तौलाप ' ८ १० कुस्तीकों दुवोसा ऋषिते प्रायेहुये बरदानका हाल व्यासजी से कृथन करना ४१ ३१ व्यासजीको गान्धारी व कुन्ती आदिसे कौरवों 'पारडवों का पुवेझुप व्‌ जन्म. लेनेका कारण व महाभारत होनेका कारण कहना अ . ४२ ३२ व्यासजीकों भीगंगाजी के जलमें वेठकर उनभारतमें मरेहुये शुरवीरोंका वाम लेलेकर बुलाना और सबको प्रकटहोना और युधिष्ठिरांदिकों देखना ४४ श्‌ ३३ कर्ण अभिमन्यु आदि व यावत्‌ युद्धभूमिमें क्षत्रिय नाशहुयेये वबको युषिष्ि- के रस चर श्र रादिकों से व्‌ उसस्थानपर प्राप्त पुरवासी स्धी पुरुषों से मिलना... १४४ ३४ राजा जनमेजयको युद्धभृमि में मृतकहुये राजाओको पुनः शरीर धारणकरने ' '' में संदेह करना और वेशुम्पाथन करि समाधान करना ा... पृ७ १४ उत्तपंदेह के निवारणाये व्यासजी करके परीक्षितको एवेंड्पसे जनमेज- यकी दिखलाना , प्रो २६ व्यासजी को धृतराष्ट्र से वेराग्यकथन करना वे युधिष्ठिर को पुरवातियों सहित वनसे लोटना का ६० २७ नारिदमुनिको युधिष्ठिरकेपात आना और युपिश्टिरते पूजेगये उक्त मुनियोकों ..' युषिष्टिरते बात्तालाप करना दर २८ राजाधृतराष्ट्र का वनाम्निमें मस्महोना सुन पारंडवोकी विलाप करता, ६४ ३१९ नारदणी करके युपिष्टिकके शोक निवारणाये उपदेश और पते की समाप्ति. ६७ इतिमहाभारतमाषा आधश्रमबासका सूचीपत्र समापहहुआ॥




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