षटखंडागम | Shatkhandagam

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : षटखंडागम  - Shatkhandagam
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about हीरालाल जैन - Heeralal Jain

Add Infomation AboutHeeralal Jain

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
चट2 ^ @ < न११११ १९ १४ १५ १६ १७१८१९विपर्यसूची १५एक सूक्म जीयफी अपेक्षा दूसरे सुश्म जीयकी, सूकम जीयकी अपेक्षा वादर जीयफी तया वाद्‌ जीपी अपेक्षा सदन जीयरी अयगादना सम्द धी.सुगावारपिशेषाका उच्येख ।सच्छिदारा अपगाइनामेदोंफि स्वामियोका निर्देश । ७१ ६ वेदनाकारविधानबेदनाकाठप्रिधानमें ज्ञातन्य ३ अनुयोगद्वारोका उस्लेगव करते हुए काठके ७ मूल-मेदो उन्टेख करते इए वाचके ७ मूलभेदौ एव उत्तर मेदोग स्वन्य । ७५पदमीमासा आदि उक्त ३े अलुयोगद्वारोंका नामोल्लेख ७७ ( पदमीमासा )पदमीमामामे वाटी अपेश्ता ज्ञानायरणीयतरेदना सम्बधी उत्दप्टअनुह्ट आदि१३ प्दोंकी प्ररखणा ७८शेप ७ वर्मोकी काख्वेदनाकि उक्त १३ पर्दोगा पिचार ८५(स््ामित्र )स्वामियके जब य उ उक्ष पदमिपयङ २ मेदोरा निर्दाजघन्यो पिषयमै नामादि निक्ष्ोकी योजना ५उ्ृष्ट विपयम नामादि निमेपोंगी योजना ८६काख्यी अपे ता उक जञानापरणीयरेदनके स्वामीकी प्रया ८८काली अपभा अनिर मेदोमिं पिभक्त अनुरषट जञानापरणीयतेदनक स्ामियोगी प्रस्पणा ९ प्रम्यणा आदि ६ अनुयोगढमरोमेः दरार उक्त अनुद स्यानपिर््योकः स्वामिरयोरीप्ररूपणा 1 १०८ झानायरणीयक ही समान देष ६ करमौकी मी उद्टृष्ट अनुकृष्ट वेदना उतगकर्‌आयु कर्मी उरुष्ट काठ्येदनके स्वामीरा निरूपण । ११२ फाटङी अक्षा अयु करम सम्बधी अनुकृष्ट वेदनावी प्रूपणा | ११६ वाटकी अक्षा जघन्य ज्ञानापरणीयत्रेदनाके स्वामीका निवेचन । ११८ काकी अपिश्ना अनघन्य ज्ञानापरणीयवेदनाके स्वामिमेरदोरी प्र पणा । १९०द्नामरणीय जीर अ तराय सम्बधी जघन्य व अजय य बेदनार्ओी ज्ञानापरणसे समानताका उव |द्‌ पटरी अपेभा जघन्य वेदमीयरेदनासि स्वामीका निर्देश । # बेदनीयकरी अजघन्य वेदना स्वामीफी प्रस्पणा { १६६ आधु, नाम ओर्‌ गोम सम्बधी जघन्य अजपन्य काट्वेदनाओरी वेदनीयवेदनासे समानतारा उल्लेख । १३४ ठगी अपेला जघन्य य अतधन्य सोहनायतेदनाओंकि स्वामियोका उत्छेय ११५(अखगदुव }




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now