कन्नड राम चन्द्र चरित पुराणम् | Kannad Ram Chandra Charit Puranam

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Kannad Ram Chandra Charit Puranam by 'परिमल', प्रयाग - 'Parimal', Prayaagअभिनव पम्प चन्द्र - Abhinav Pamp Chandra

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परिमल प्रयाग - Parimal Prayaag

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पम्प रामायण रछ रसम॑ भावमनंथम - रचनेंयं -कांव्यजश्ञरार्यूदु भा- . विसि: नांदीपद त्ायकाभ्युदय पर्यतंबर॑ कूड शो- घधिसि नोकको, रघुवंशराम कृतियॉछ पत्तेंप्ट पर्यंग् पॉसेंवें. -. यत्नदिनाद्यरग्यतनरेकारादो्ड,. : पेछरे ॥ ३३ ॥ रागद्वेघष. निबंधमप्प: .कृतियं निर्बधदि . बंधमि . - बागर्थ प्रोसतागें पेछदखिलंमं . रागाविलंसाकूप वि- द्यागवंग्रह -, पीडितर,. स्वपरवाधाहेतुव॑. दुस्तरो- . द्योग क्लेशितरागि बित्ति.. बेकवंतक्कूं , विंषोद्यालमं || ३४ ॥। पॉगछदु महात्मरूज़ंज्वलमेनिप्प गुणंगल्वनुज्ज्वल प्रसि- ' ड्रिगें पॉलनागदुज्जलिसिद प्रतिम प्रतिभा प्रभावदि .. पॉगढदु, दुरात्मरं मॉगदॉल्िदुगुछ पॉरशिक्लाद ना- लगॉयवर्नेत्तु, . .नालगेयॉकछोदिदव॑. कृतिये - कृताथर्थने भेदिसें भानु. भानु तममं तरिसंदु पदार्थमं परि« ज|्छेदिसि कांए्रवोलू जनविलोचनप्रतिम , प्रभावर- प्पादि कर्वीश्वरर नंद पद्धतियि तनगर्थ शुद्धिवे-. ... , :. त्तादॉरेयंगमें . न्डबुदच्चरिये कविराज .वीथियॉछ ॥ ३६'।॥॥, नायकनन्यनागें. . कंति' . विश्वुतमागदुदात्त राघव ...., _नायकनागें ' विश्रुतर्मेंनिप्पुदु . विस्मयकारियल्तु का- ॥ ३५ ॥॥ सा! रा! न अतक् अल कर 2२२६००२७३७२३२७/७८न 5 यररन ० पल जम 9१९45 <८०८# ०८ कर 2२५४५ ०५७०२२६०६००/२३६७७७२६५/६२२०६/०२३०२४००४३०९४४२२०३८४७०/६६४४३६६८८०१६ और ह॒वा,- वर्षा. और गणगर्जन का साथ-साथ निर्माण-किया है, उसी- तरह- सज्जनों .एवं दुर्जनों की: एक साथ सृष्टि की है। ३२: इस. रघुवंश की रामकथा में नावदी पद से नायकाभ्युदय तक रचित आठ-दस पद्मों में रस, भाव, अर्थ को काव्यज्ञ - परखें।] ३३. कवि अपने विद्यागर्व के कारण, रागद्वेष से दोषपूर्ण कृति को, हृदयंगम ढंग से. नक हकर उसमें: बाधक बनता है, तो वह स्वयं में एवं ओरों में विष के उद्यान का निर्माण करता है, और-कुंछ नहीं । ३४ महात्माओं की उज्ज्वल प्रसिद्धि के कारणीशृत शुणों का वर्णण करके उत्तकी अप्रतिम प्रतिभा की प्रशंसा किए बिना, दु्जंतों के मुंह की थूक्री हुई जूठझन की तरह; कृति निर्माण करनेवाला कवि और उसकी क्ति क्‍या #तार्थ हो सक्रती है? ३५ सूर्य, अंधकार चीर देता है तो लोगों को हर वस्तु: स्पष्ट दिखाई देती है। उसी तरह अप्रतिभ प्रतिभावान पूव॑वर्ती कवियों के राजमार्ग में कदम बढ़ाकर कृतकृत्य होना-मेरे लिए क्या असाध्य (कार्य) है ? ३६ - कथा- नायक साधारण हो तो कृति. प्रख्यात नहीं हो सकती । उदात्त . राघव




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