सौन्दर्य लहरी | Soundarya Lahari

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Soundarya Lahari by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्य्‌ अवाचीन सब विद्वानों का एक मत होने से, यह विषय आधिक विवादास्पद नहीं है; श्रीमच्छलूकर भगवत्पाद के लिखित अनेक देवी देवताओं के स्तोत्र प्रासिद्ध हैं, परन्तु बिद्वत्समाज का जितना ध्यान सौन्दर्य छहरी ने आकर्षित किया है ओर अब भी वह जितने मान से देखी जाती है, उतना दूसरा स्तोत्र नहीं हैं। सौंदर्य लहरी पर ओऔ अच्युतानन्द, पंडित अनन्त कृष्ण झास्री और छक्ष्मीधर जेसे विद्वानों की टीकाएं संस्कृत साहित्य में बड़े आदर से देखी जाती हैं । कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश सर जोन बुड़फ महोदय ने भी, जो तांत्रिक संसार-में आर्थर अवैलन के नाम से प्रसिद्ध हैं ओर तांत्रिक साहित्य का अन्वेषण, अध्ययन ओर प्रकाशन करके पाश्चात्य जगत्‌ का ध्यान इस ओर खेँंचने का श्रेय जिनको ग्राप्त है, सौंदये लहरी के पूर्व भाग आनन्द छद्दरी पर एक संक्षिम अंग्रेजी टीका लिखी है। उक्त टीका के प्राकू कथन (0/219०९) में जो मत प्रकट किया गया है, वह हम पाठको की -जानकारी के लिये यहां नीचे देते हें । तदनुसार बंगाल के प्रसन्नकुमार शास्त्री की ई. सन १९०८ में प्रकाशित श्री शडकराचार्य गंथावालि में सोन्दर्य लहरी को भी स्थान दिया गया हैं। और वहां पाठकों का लक्ष्य महामहोपाध्याय शत्तीशचन्द्र विद्याभूषण के कलकत्ता रिव्यू के १९१५ जूलाई मास के अंक में प्रकाशित एक लेख की ओर भी कंराया गया है । आप का कहना है कि सोन्दय लहरी की प्राचीनता तो इस बात से काफी निश्चय के साथ प्रमाणित है कि इस पर स्तोन्न साहित्य में सब से अधिक टीकायें मिलती हैं, यद्यपि यह बात उसके भगवत्पाद का लेख होने का तो प्रमाण नहीं कही जा सकती; परन्तु सारे भारतवर्ष में




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