पीड़ित चेहरों का मर्म | Peedit Cheharon Ka Marm

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Book Image : पीड़ित चेहरों का मर्म  - Peedit Cheharon Ka Marm
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सूखासूखा हैसब कुछ सूख गया हैयहांचरमरा रहो हैं खेजड़ियांपेड़ों की रूह कांप रही हैकिसी बूढ़े रोगी को झुको कमर-सी लटक एई हैं डालेंन जाने कब टूट गिरेंचर्‌ चर्‌ करतीं'फट गई है जमीनजगह-जगहजैसे वुभुक्षु के ओठों को'पपड़ियांधूल के गुबार मेंसब कुछ रूखा, धुंधला और वीरान मटके नहीं डबडबाते कुओं-बाबड़ियों मेंनदी नंगी हैउसके शरीर पर कोई वस्त्र नहींपीड़ित चेहरों का मर्म/27




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