अपने सूरज पर विश्वास | Apane Suraj Par Vishwas

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Apane Suraj Par Vishwas by वसु आचार्य - Vasu Aacharya

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about वसु आचार्य - Vasu Aacharya

Add Infomation AboutVasu Aacharya

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
मगर तुम्हारा यह वहम जरूरी भी है तुम्हारे हो भले के लिये कि मैं जो कुछ बोलता हूं वह सिवाय बड़बड़ाने के और कुछ नहीं श्रोर तुम जवाब में ग्रपना हाथ हवा में हिला देते हो मैं भ्रपनी तनी गर्दन लिये किसी गली में सो जाता हूँ तुम सोचते हो गली” भलो मिली चला व्ली मैं सोचता हूं गसी से हो 'मेंदान' धुर होगा शि




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now